कोरोना का ये ,काल है।
जग में हुआ बुरा हाल है।
वोहान (चाइना) ने चलाया खंजर है।
मौत के दौर सा हो गया, चारो तरफ का मंजर है।
इंसान अपने ही घर में कैद परिंदा सा है।
तो किसी के घर में फैला मातम सा है।
कोई छत के नीचे, निराश होकर बैठ गया है।
तो कोई चिता में लगी,आग के नीचे लेट गया है।
कोई उदास है बेरोजगारी के चलते,
ये कैसे बीमारी है,(सोशल डिस्टेंसिंग की वजह से)
जब मौत पर भी, अपने गले तक नहीं हैं मिलते।
किसकी अंतिम विदाई है,
तो ना जाने अगली बारी, किसकी आई है
देहांत की खबर, अब हर जगह से आई है
किसी को घर में तड़पते देख रहे है,
(ऑक्सीजन की कमी की वजह से)
तो ना जाने कितनो की अर्थी खुद डॉक्टरों ने जलाई है
किसकी गलती है, किसकी नहीं,
ना जाने कितनो को इस गलती की सजा सुनाई है।
अपनो से ही दूर हो गए, ऐसी क्या रुसवाई है।
हर तरफ, इस बीमारी ने,ये कैसी आफत मचाई है।
डॉक्टर नर्स भी परेशान है,
किस पर दे सबसे ज्यादा ध्यान,
हर तरफ तो तड़प रहा है इंसान ।
ना कोई अप्रोच, अब तो पैसा भी ना आता काम है।
अब भी किसी को बाहर जाना है
तो किसी के लिए बीमारी का ड्रामा है, ये बहाना है
खुद ही सोचो, कितने लोग चले गए
क्या आपको भी ऊपर जाना है..??
(जो लोग अब भी मज़ाक समझते है इस बीमारी को )
कोरोना का ये काल है
जग में मचा बुरा हाल है
अंत में बस इतना ही, कि
घर में रहना है, बीमारी को पास ना लाना है
ना ही खुद,कोरोना से मिलने बाहर जाना है।
उम्मीद है आपको poetry अच्छी लगी होगी। और poem quotes read karne k leye aap neche deye page ko follow kre
उम्मीद है कि आप सभी स्वस्थ होंगे, ऊपर वाले की कृपा आप सभी पर बनी रहे।
एवम जिनके अपने नहीं रहे उनके लिए सहानुभूति , एवम मै प्रार्थना करती हू कि भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।🙏
