Showing posts with label Poetry. Show all posts
Showing posts with label Poetry. Show all posts

कौन हूं मै??

जिंदगी को देख हैरान हूं मै
हां सच है, बहुत परेशान हू 
चुप हूं अगर मै,
तो सबको लगता है नादान हूं मैं..

दुनिया की इस रीत से शायद अनजान हूं मै
खामोशी जरूरी है, मगर दर्द मुझे भी होता है
क्युकी आखिर में इंसान हूं मै..

कुछ गमों को सीए रहती हु दिल में,
दिल उदास है, फिर भी मुस्कुरा देती हु
और लोगो को लगता है, खुश हूं मै

लिख कर दर्द बयां करना,
अब जरूरी है जैसे
और सबको लगता है
इतना दर्द कैसे? लिख लेती हूं मै

ना शिकायत किसी से,
ना जरूरत किसी की,
पन्नो पर उतरते है, कुछ जस्बात मेरे,
जैसे लिखने के लिए बनी हूं मै

अंत में बस ये ही बताना है की कौन हूं मैं
 ये मै ,कोई और नहीं,
हर एक के अंदर छुपा दर्द हूं, मै

कुछ लिख कर बता जाती हूं,
कुछ यूं बेवजह हक जता देती हूं
दिल टूटने पर भी, 
जो जिंदा लाश है, वो इंसान हूं मै

अगर कविता आपको पसंद आई तो अपना फीडबैक कॉमेंट बॉक्स में जरूर दे,
और कोट्स और शायरी पढ़ने के लिए इंस्टाग्राम पेज को फॉलो कर सकते है।

Share kare 😊



लड़की का जीवन ऐसा क्यों???

ज़िंदगी मिली है एक, तो बार-बार सोचूं क्यों?
कभी किसी रिश्ते से,
तो कभी किसी अजनबी से डरना क्यों??
आज़ाद पंछी की तरह मै, फिरू ना क्यों?
आखिर लड़की का जीवन इतना कठिन है क्यों?

दुनिया की सोच इतनी छोटी है, क्यों?
और,मैं अगर बदलाव की बात करू,
तो उस बदलाव के लिए, मेरी उम्र कम है क्यों??
और अगर उम्र कम है,तो समाज में बालविवाह होते है क्यों???
आखिर लड़की का जीवन ऐसा होता है क्यों???

ज़िंदगी जीने का हक़ देता है, ये रब सबको,
फिर सिर्फ लड़कियों के हक़ को मारते हैं क्यों??
आखिर लड़की का जीवन इतना कठिन है क्यों???

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का फिर ये झूठा नारा क्यों?
पढ़ने वाले हाथो में किताब की जगह, मेंहदी और
शादी का जोड़ा देते हो क्यों??
आखिर लड़की का जीवन इतना बेबस है क्यों???

जब ज़िंदगी मिली एक, तो बार—बार सोचना क्यों?
दर्द भरी आवाज के पीछे, झूठी हसी से हंसना है क्यों??
जब काबिल बन कर खुद को संभाल सकती है,
फिर दुनिया की फिकर, या शादी की, ज़िद्दी है क्यों??
आखिर लड़की का जीवन इतना कठिन है क्यों?????

शादी के बाद खुद के  बजाए, पति और बच्चों के लिए जीना है,
तो फिर, जीवन दूसरे के लिए कह कर, 
खुद का जीवन जियो.. ऐसी प्रेरणा का झूठा ढोंग है क्यों??

सपनो को पूरे करवाने की बात करते है, 
फिर सपनो के आड़े, खुद ही आते है,क्यों??
आखिर में एक लड़की एक बेटी से एक पत्नी और मां का सफर ही तो तय करती है, 
उसकी  ज़िंदगी केवल इतनी सी ही,क्यों??

एक लड़की, एक बहु बन कर सारा घर है संभाले,
फिर भी वो बेरोजगार क्यों? 
ज़िंदगी का पूरा सफर सिर्फ दूसरे के लिए ही जीना है क्यों???
आखिर एक लडकी का जीवन इतना कठिन है क्यों??
जब ज़िंदगी एक मिली है, तो बार बार सोचना है क्यों??

मां बन कर बच्चों को संभाले, फिर सिर्फ पिता का नाम ही हर जगह आता है क्यों??
अच्छा करे तो पिता का नाम, फिर तानो में सिर्फ मां का नाम ही क्यों?
आखिर एक लडकी का जीवन इतना कठिन है क्यों??
जब ज़िंदगी एक मिली है, तो बार बार सोचना ही क्यों??

देवी या मां के रूप में पूजते है जिसको,
फिर बलात्कार के अपराध इतने होते है क्यों??
आखिर एक लडकी का जीवन इतना कठिन है क्यों??



वक्त की बात

     वक्त की बात

वक्त वक्त की बात है
आज दुख: की, तो कल फूलो वाली रात है।

एक डोली उठी, तारो वाली जगमगाती रात है।
तो कभी किसी अपने के साथ बीती, आखिरी रात है।

कोई रात अकेली कटी,
तो किसी से सालों बाद हुई मुलाकात है।

किसी रात में प्यार की मौत,
तो कभी किसी से हो रहे, प्यार की ये पहली रात है।

किसी के झूठे वादे,भी सच्चे
तो किसी के सच्चे वादे भी लगते, जैसे फीके जस्बात है।

कभी खुद अपनो की राख पर बैठ रोए सारी रात है,
कभी जश्न मे बीती पूरी रात है।

अपनो से मिले गम की सौगात है
तो कभी ग़ैर के साथ भी,अपनो वाली बात है।

कोई इंसान अच्छा या बुरा नहीं,
ये तो बस वक्त वक्त की बात है।

बुरे तो बस उसके हालात है,
आज दुख की तो कल खुशी वाली रात है।



दूरी भी जरूरी थी।

जब मै उसको खोना नहीं चाहती थी।
उसी पल में मैने उसको खो दिया,
एक प्यारा दोस्त या ज़िन्दगी
हर रिश्ते में उसी का नाम दिया।
मगर दूरी भी ज़रूरी थी।

सच कहूं तो दूरी ही जरूरी थी।
थोड़ी इस दिल की मज़बूरी
थोड़ी दिमाग की मंजूरी थी।
मैंने उसे तब खोया, जब 
वो मेरे लिए बहुत जरूरी थी।
मगर दूरी भी जरूरी थी।

आंसू छुपा लिए थे उससे
जब वो मेरे सामने खड़ी थी
और पूछा उसने क्या ? ये सब में मेरी मंजूरी थी।
और कह दिया,  मैंने कि हां
अलग होने में मेरी मंजूरी थी।
 मगर दूरी भी जरूरी थी।

कुछ इस क़दर अपने दिल की दूरी थी।
उस झूठ को सच मानना उसकी भी,
और मेरी भी मंजूरी थी।
कुछ ऐसी ये मज़बूरी थी
मगर दूरी भी जरूरी थी।

अलग होने पर अब उसका दिल भी राज़ी है
मगर इस दिल की चोट आज भी ताज़ी है

लाज़वाब हो तुम

मेरे अल्फ़ाज़ की शायरा हो तुम।
डूबते हुए TJ's का हौसला हो तुम।
मेरे इस मिजाज़ का अंदाज़ हो तुम।
वैसे तो चेहरे से ही नहीं, बल्कि दिल से भी खूबसूरत हो तुम।
यू तो हाज़िर जवाब हो तुम।
जो भी हो आखिर लाजवाब हो तुम।
यूं तो गुस्से में आग हो तुम,
पर मेरा चिराग हो तुम।
जो भी हो आखिर लाजवाब हो तुम।
ऐसे तो चेहरे से नवाब हो तुम।
या यूं कहिए कि मेरा ख्वाब हो तुम।
वैसे तानी का तारा हो तुम।
एक प्यारा सा एहसास हो तुम।
कैसे बयां करू तुम्हे, कि क्या हो तुम।
मेरे इस गीत के अल्फ़ाज़ हो तुम।
जो भी हो आखिर लाजवाब हो तुम।


गुमनाम दोस्त

कोई तुमसे पूछे कौन हूं मैं, तुम कह देना कोई खास नहीं    एक दोस्त है पक्का कच्चा सा, एक झूठ है आधा सच्चा सा जस्बात से ढका  एक परदा है एक बहान...