गुमनाम दोस्त

कोई तुमसे पूछे
कौन हूं मैं,
तुम कह देना
कोई खास नहीं 
 
एक दोस्त है
पक्का कच्चा सा,
एक झूठ है
आधा सच्चा सा

जस्बात से ढका 
एक परदा है
एक बहाना कोई
अच्छा सा,

जीवन का एक ऐसा साथी है
जो पास होकर भी
पास नहीं 

कोई तुमसे पूछे
कौन हूं मैं,
तुम कह देना
कोई खास नहीं ।

एक साथी जो कुछ 
अनकही सी बात कह जाता है।

यादों में जिसका
एक धुंधला सा चेहरा रह जाता है।

यूं तो उसके ना होने का 
मुझे कोई गम नही

पर कभी कभी आंखों से 
आंसू बनकर बह जाता है

यू रहता तो मेरे जहन में है, 
पर नजरों को उसकी तलाश नहीं

कोई तुमसे पूछे
कौन हूं मैं,
तुम कह देना
कोई खास नहीं 

साथ बनकर जो रहता है
वो दर्द बांटता जाता है

भूलना जो चाहूं उसको,
तो यादों में वो आ जाता है

अकेला महसूस करू,
तो सपनो में वो आ जाता है

मै साथ खड़ा हूं सदा तुम्हारे
कहकर साहस दे जाता है

ऐसे ही रहता है साथ मेरे 
उसकी मौजूदगी का एहसास नही

कोई तुमसे पूछे
कौन हूं मैं,
तुम कह देना
कोई खास नहीं 

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