मै और मेरा अकेलापन

मै और मेरा अकेलापन

मेरे साथ मेरा अकेलापन रहता है।
चिढ़ाते हुए, मुझे एक बात वो कहता है।।
चाहे कितने भी कोशिश कर लो तुम महफीले सजाने की।
चाहे कितनी भी कोशिश कर लो तुम हंसने और मुस्कुराने की।।
इस बेरहम दुनिया में तुम कुछ नही कर पाओगे।
हस्ते हुए चेहरे के पीछे भी बस आंसू ही छुपाओगे।।
ये दुनिया मतलबी है साथ छोड़ देती है।
जरूरत पड़ने पर मुंह मोड़ लेती है।।
इनसे अच्छा तो मैं हूं।
अंत तक साथ निभाऊंगा।।
जब कोई पास ना हो तेरे।
तो मैं ही पास में पाऊंगा।।
इस दुनिया में मै ही तो हूं।
जो तुझे समझता हूं।।
एक मै ही तो हु जो तेरे दर्द पर नही हंसता हूं।
वरना ये दुनिया वाले ओरो के दर्द पर हंसते है।।
दुःख बांटने से तो गए, जख्मों पर नमक छिड़कते है।
वहां कितनी भी कोशिश कर लो, तुम किसी का साथ नही पा पाओगे।
अकेले थे, अकेले हो और अकेले ही रह जाओगे।।

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