गुमनाम दोस्त

कोई तुमसे पूछे
कौन हूं मैं,
तुम कह देना
कोई खास नहीं 
 
एक दोस्त है
पक्का कच्चा सा,
एक झूठ है
आधा सच्चा सा

जस्बात से ढका 
एक परदा है
एक बहाना कोई
अच्छा सा,

जीवन का एक ऐसा साथी है
जो पास होकर भी
पास नहीं 

कोई तुमसे पूछे
कौन हूं मैं,
तुम कह देना
कोई खास नहीं ।

एक साथी जो कुछ 
अनकही सी बात कह जाता है।

यादों में जिसका
एक धुंधला सा चेहरा रह जाता है।

यूं तो उसके ना होने का 
मुझे कोई गम नही

पर कभी कभी आंखों से 
आंसू बनकर बह जाता है

यू रहता तो मेरे जहन में है, 
पर नजरों को उसकी तलाश नहीं

कोई तुमसे पूछे
कौन हूं मैं,
तुम कह देना
कोई खास नहीं 

साथ बनकर जो रहता है
वो दर्द बांटता जाता है

भूलना जो चाहूं उसको,
तो यादों में वो आ जाता है

अकेला महसूस करू,
तो सपनो में वो आ जाता है

मै साथ खड़ा हूं सदा तुम्हारे
कहकर साहस दे जाता है

ऐसे ही रहता है साथ मेरे 
उसकी मौजूदगी का एहसास नही

कोई तुमसे पूछे
कौन हूं मैं,
तुम कह देना
कोई खास नहीं 

मै और मेरा अकेलापन

मै और मेरा अकेलापन

मेरे साथ मेरा अकेलापन रहता है।
चिढ़ाते हुए, मुझे एक बात वो कहता है।।
चाहे कितने भी कोशिश कर लो तुम महफीले सजाने की।
चाहे कितनी भी कोशिश कर लो तुम हंसने और मुस्कुराने की।।
इस बेरहम दुनिया में तुम कुछ नही कर पाओगे।
हस्ते हुए चेहरे के पीछे भी बस आंसू ही छुपाओगे।।
ये दुनिया मतलबी है साथ छोड़ देती है।
जरूरत पड़ने पर मुंह मोड़ लेती है।।
इनसे अच्छा तो मैं हूं।
अंत तक साथ निभाऊंगा।।
जब कोई पास ना हो तेरे।
तो मैं ही पास में पाऊंगा।।
इस दुनिया में मै ही तो हूं।
जो तुझे समझता हूं।।
एक मै ही तो हु जो तेरे दर्द पर नही हंसता हूं।
वरना ये दुनिया वाले ओरो के दर्द पर हंसते है।।
दुःख बांटने से तो गए, जख्मों पर नमक छिड़कते है।
वहां कितनी भी कोशिश कर लो, तुम किसी का साथ नही पा पाओगे।
अकेले थे, अकेले हो और अकेले ही रह जाओगे।।

एक निशानी हूं मैं

 रख सको तो एक निशानी हूं मैं
खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूं मैं
रोक ना पाए जिसको ये सारी दुनिया
वो एक बूंद आंख का पानी हूं मैं

सबको प्यार देने की आदत है हमे
अपनी अलग पहचान बनाने की आदत हैं हमे
कितना भी गहरा जख्म दे कोई
उतना ही ज्यादा मुस्कुराने की आदत है हमे

इस अजनबी दुनिया में अकेला ख्वाब हूं मैं
सवालों से खफा छोटा सा जवाब हूं मैं
जो समझ ना सके मुझे उनके लिए कौन
जो समझ गए उनके लिए खुली किताब हूं मैं

आंखो से देखोगे तो खुश पाओगे
दिल से पूछोगे तो दर्द का सैलाब हूं मैं
अगर रख सको तो एक निशानी हूं मैं
खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूं मैं


कौन हूं मै??

जिंदगी को देख हैरान हूं मै
हां सच है, बहुत परेशान हू 
चुप हूं अगर मै,
तो सबको लगता है नादान हूं मैं..

दुनिया की इस रीत से शायद अनजान हूं मै
खामोशी जरूरी है, मगर दर्द मुझे भी होता है
क्युकी आखिर में इंसान हूं मै..

कुछ गमों को सीए रहती हु दिल में,
दिल उदास है, फिर भी मुस्कुरा देती हु
और लोगो को लगता है, खुश हूं मै

लिख कर दर्द बयां करना,
अब जरूरी है जैसे
और सबको लगता है
इतना दर्द कैसे? लिख लेती हूं मै

ना शिकायत किसी से,
ना जरूरत किसी की,
पन्नो पर उतरते है, कुछ जस्बात मेरे,
जैसे लिखने के लिए बनी हूं मै

अंत में बस ये ही बताना है की कौन हूं मैं
 ये मै ,कोई और नहीं,
हर एक के अंदर छुपा दर्द हूं, मै

कुछ लिख कर बता जाती हूं,
कुछ यूं बेवजह हक जता देती हूं
दिल टूटने पर भी, 
जो जिंदा लाश है, वो इंसान हूं मै

अगर कविता आपको पसंद आई तो अपना फीडबैक कॉमेंट बॉक्स में जरूर दे,
और कोट्स और शायरी पढ़ने के लिए इंस्टाग्राम पेज को फॉलो कर सकते है।

Share kare 😊



निभाना कोई नही चाहता

प्यार सब पाना चाहते है
पर निभाना कोई नही चाहता।

पास सब आना चाहता है,
हक भी सब जताते है,
पर हक देना, कोई भी चाहता...

दर्द सबके दिल में है,
मगर बताना कोई नही चाहता।।

रूठे है सब इस दुनिया में,
मगर मनाना कोई नही चाहता।।

अकेले है सब,
पर साथ कोई आना नही चाहता।।

खुदकुशी कर लेते है, मगर
खुद की खुशी के लिए,  
खुद को जानना तक भी,कोई नही चाहता।।

दिल तो सबका दुखा है,मगर इस दुनिया में,
दूसरी बारी आजमाना कोई नही चाहता।।

उलझे हैं सब यहां मगर, 
सुलझाना कोई नही चाहता।।

सुनाते है सब,
मगर सुनना कोई नही चाहता।।

कहते है सब हम तुम्हारे साथ है,
मगर साथ कोई देना भी नही चाहता।।

प्यार पाना तो सब चाहते है
पर निभाना कोई नही चाहता।।


Instagram.  पर follow करने के लिए tap kre Instagram par



कोरोना का काल

कोरोना का  ये ,काल है।
जग में हुआ बुरा हाल है।
वोहान (चाइना) ने चलाया खंजर है।
मौत के दौर सा हो गया, चारो तरफ का मंजर है।

इंसान अपने ही घर में कैद परिंदा सा है।
तो किसी के घर में फैला मातम सा है।
कोई छत के नीचे, निराश होकर बैठ गया है।
तो कोई चिता में लगी,आग के नीचे लेट गया है।

कोई उदास है बेरोजगारी के चलते,
ये कैसे बीमारी है,(सोशल डिस्टेंसिंग की वजह से)
जब मौत पर भी, अपने गले तक नहीं हैं मिलते।
 
किसकी अंतिम विदाई है,
तो ना जाने अगली बारी, किसकी आई है
देहांत की खबर, अब हर जगह से आई है
किसी को घर में तड़पते देख रहे है,
(ऑक्सीजन की कमी की वजह से)
तो ना जाने कितनो की अर्थी  खुद डॉक्टरों ने जलाई है

किसकी गलती है, किसकी नहीं,
ना जाने कितनो को इस गलती की सजा सुनाई है।
अपनो से ही दूर हो गए, ऐसी क्या रुसवाई है।
हर तरफ, इस बीमारी ने,ये कैसी आफत मचाई है।

डॉक्टर नर्स भी परेशान है,
किस पर दे सबसे ज्यादा ध्यान,
हर तरफ तो तड़प रहा है इंसान ।
ना कोई अप्रोच, अब तो  पैसा भी ना आता काम है।

अब भी किसी को बाहर जाना है
तो किसी के लिए बीमारी का ड्रामा है, ये बहाना है
खुद ही सोचो, कितने लोग चले गए
क्या आपको भी ऊपर जाना है..??
(जो लोग अब भी मज़ाक समझते है इस बीमारी को )

कोरोना का ये काल है
जग में मचा बुरा हाल है
अंत में बस इतना ही, कि
घर में रहना है, बीमारी को पास ना लाना है
ना ही खुद,कोरोना से मिलने बाहर जाना है।




उम्मीद है आपको poetry अच्छी लगी होगी।  और poem quotes read karne k leye aap neche deye page ko follow kre



उम्मीद है कि आप सभी स्वस्थ होंगे, ऊपर वाले की कृपा आप सभी पर बनी रहे।
एवम जिनके अपने नहीं रहे उनके लिए सहानुभूति , एवम मै प्रार्थना करती हू कि भगवान  उनकी आत्मा को शांति दे।🙏

लड़की का जीवन ऐसा क्यों???

ज़िंदगी मिली है एक, तो बार-बार सोचूं क्यों?
कभी किसी रिश्ते से,
तो कभी किसी अजनबी से डरना क्यों??
आज़ाद पंछी की तरह मै, फिरू ना क्यों?
आखिर लड़की का जीवन इतना कठिन है क्यों?

दुनिया की सोच इतनी छोटी है, क्यों?
और,मैं अगर बदलाव की बात करू,
तो उस बदलाव के लिए, मेरी उम्र कम है क्यों??
और अगर उम्र कम है,तो समाज में बालविवाह होते है क्यों???
आखिर लड़की का जीवन ऐसा होता है क्यों???

ज़िंदगी जीने का हक़ देता है, ये रब सबको,
फिर सिर्फ लड़कियों के हक़ को मारते हैं क्यों??
आखिर लड़की का जीवन इतना कठिन है क्यों???

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का फिर ये झूठा नारा क्यों?
पढ़ने वाले हाथो में किताब की जगह, मेंहदी और
शादी का जोड़ा देते हो क्यों??
आखिर लड़की का जीवन इतना बेबस है क्यों???

जब ज़िंदगी मिली एक, तो बार—बार सोचना क्यों?
दर्द भरी आवाज के पीछे, झूठी हसी से हंसना है क्यों??
जब काबिल बन कर खुद को संभाल सकती है,
फिर दुनिया की फिकर, या शादी की, ज़िद्दी है क्यों??
आखिर लड़की का जीवन इतना कठिन है क्यों?????

शादी के बाद खुद के  बजाए, पति और बच्चों के लिए जीना है,
तो फिर, जीवन दूसरे के लिए कह कर, 
खुद का जीवन जियो.. ऐसी प्रेरणा का झूठा ढोंग है क्यों??

सपनो को पूरे करवाने की बात करते है, 
फिर सपनो के आड़े, खुद ही आते है,क्यों??
आखिर में एक लड़की एक बेटी से एक पत्नी और मां का सफर ही तो तय करती है, 
उसकी  ज़िंदगी केवल इतनी सी ही,क्यों??

एक लड़की, एक बहु बन कर सारा घर है संभाले,
फिर भी वो बेरोजगार क्यों? 
ज़िंदगी का पूरा सफर सिर्फ दूसरे के लिए ही जीना है क्यों???
आखिर एक लडकी का जीवन इतना कठिन है क्यों??
जब ज़िंदगी एक मिली है, तो बार बार सोचना है क्यों??

मां बन कर बच्चों को संभाले, फिर सिर्फ पिता का नाम ही हर जगह आता है क्यों??
अच्छा करे तो पिता का नाम, फिर तानो में सिर्फ मां का नाम ही क्यों?
आखिर एक लडकी का जीवन इतना कठिन है क्यों??
जब ज़िंदगी एक मिली है, तो बार बार सोचना ही क्यों??

देवी या मां के रूप में पूजते है जिसको,
फिर बलात्कार के अपराध इतने होते है क्यों??
आखिर एक लडकी का जीवन इतना कठिन है क्यों??



गुमनाम दोस्त

कोई तुमसे पूछे कौन हूं मैं, तुम कह देना कोई खास नहीं    एक दोस्त है पक्का कच्चा सा, एक झूठ है आधा सच्चा सा जस्बात से ढका  एक परदा है एक बहान...