दोस्तों! इस हिस्से में हम ये जानेंगे की, स्नेहा काम पर अगले दिन क्यों नहीं जाती??
स्नेहा काम पर जब पहले दिन जाती है तो किराने की दुकान का मालिक उसे गलत तरह से छुता है और स्नेहा के साथ गलत करने की कोशिश करता है।
स्नेहा वहाँ से नौकरी छोड़ देती है, और दूसरी नौकरी की तलाश करने लगती है। कुछ दिन तक स्नेहा को नौकरी नहीं मिलती, तब तक स्नेहा घर में अपनी डायरी में लिखना शुरू करती है, और वो बाते लिखती है, जो काफी अरसे से उसके जहन में थी, उन सभी बातो को स्नेहा अपने शब्द दे देती है।
स्नेहा को लिखने का धीरे धीरे आदत हो जाती है, और वो आदत कुछ इस क़दर बढ़ जाती है, की वो जिस रात ना लिखे उसे चैन नहीं मिलता।
एक रोज़ जब वह नौकरी की तलाश में निकलती है तो उसे किसी तरह डॉमिनोज में नौकरी मिल जाती है, वहाँ उसे ऑर्डर लेने के काम मिल जाता है। स्नेहा दिन में काम किया करती, और रात में अपनी डायरी लिखा करती थी।
उसकी जिदंगी जैसे नौकरी और डायरी के बीच ही सिमटी हुई थी, ना कोई दोस्त ना कोई प्यार।
अपने मां-पापा की मौत के बाद स्नेहा गुमसुम रहने लगी थी। लेकिन शायद उसका ये अकेलापन जल्द ही भरने वाला था।
एक रोज़ एक लड़का अपने कुछ दोस्तों को पार्टी देने डॉमिनोज जाता है, इस लड़के का नाम आदित्य होता है, आदित्य पिज़्ज़ा का ऑर्डर देने काउंटर पर जाता है, जैसे ही ऑर्डर देने लगता है, उसकी नजर स्नेहा पर पड़ती है, जो सबके ऑर्डर को रि-चेक कर रही होती है।
आदित्य को स्नेहा से पहली ही नज़र में प्यार हो जाता है, और अब वो स्नेहा से मिलने के बहाने रोज़ डॉमिनोज आने लगता है, और जान बूझकर ऑर्डर स्नेहा को ही लेने को कहता है। धीरे-धीरे बातचीत करते-करते स्नेहा और आदित्य की दोस्ती हो जाती है।
अब आदित्य और स्नेहा अब बहार भी मिलने लगते हैं, इसी बीच कुछ दिन स्नेहा काम पर जा नहीं पाती, तो आदित्य परेशान हो जाता है और डॉमिनोज के आउटलेट के मालिक से स्नेहा के घर का पता ले कर स्नेहा से मिलने जाता है।
जब वो उसके घर पहुंचता है, तो देखता है, कि वो बीमार है, और आराम कर रही है। आदित्य को अपने घर पर अचानक देख कर स्नेहा थोड़ी अनकम्फर्टेबल हो जाती है, और पूछती है "अरे! आदित्य तुम यहां क्यों आगये ?? आदित्य जवाब देता है "तुमसे मिलने आया हूँ, क्यों नहीं आ सकता क्या?" , इस पर स्नेहा हंसकर कहती हैं, "नहीं-नहीं, ऐसा नहीं है, अच्छा तुम बैठो मैं पानी लाती हूँ"। इतना कह कर स्नेहा आदित्य के लिए पानी लेने के लिए किचन में जाती है।
जैसे ही स्नेहा रसोई में जाती है आदित्य की नजर स्नेहा की डायरी पर पड़ती है। आदित्य उस डायरी को उठा कर पढ़ने वाला ही होता है स्नेहा तब तक पानी ले कर आ जाती है। आदित्य डायरी छिपा लेता है और अपने घर जा कर डायरी पढ़ता है। डायरी पढ़ते-पढ़ते उसके होश उड़ जाते है।
लेकिन उस डायरी में ऐसा क्या था? ये हम कहानी के अगले हिस्से में हम जानेंगे की आदित्य डायरी में ऐसा क्या पढ़ता है?? जिससे उसके होश उड़ जाते है।
***********************************************************************************
उम्मीद है आपको ये कहानी पसन्द आयी होगी, अपना फीडबैक ज़रूर दीजिए comment box में... 🙏
मेरे quotes पढ़ने के लिए आप मुझे Instagram पर follow कर सकते हैं @quotestjs पर...
अगर किसी वजह से आपने कहानी का पहला भाग मिस किया हो तो , नीचे दिए गए लिंक से आप पहला भाग पढ़ सकते हैं।
धन्यवाद 🙏
************************************************************************************

कहानी अच्छी है अब अगले भाग का इंतजार रहेगा...
ReplyDeleteI've been keenly following your stories. These are superb. superb.Especially the way you bring it out in parts, maintains the fervourness & zest in the minds of readers.
ReplyDeleteMost importantly the story is relatable which marks the brilliance of the writer (you).
Also, it is commendable how you can connect with the people, just through your words.
The flow of the story is also worthy of appreciation.
Keep doing the good work.
Waiting for the best part ☺️
thanks for compliment, but in this work my friend Sanjita Ghosh (Shayera) she is always there for me to support...
Deleteif you want to read more good stuffs you can check her blog also....
https://sanjitaghoshshayera.blogspot.com/
Amazing can't wait for the next part it will be superb I'm sure🙌🏻 all the best & keep going ❤️
ReplyDeleteAs soon as possible next part AA jaega....
DeleteBahot accha likhti ho aap Taruna sharma ji... Apka likha padne ke baad kisi or writer ka likha accha hi nhi lagta.
ReplyDeleteVery good story tanu, your are are good writter 💐🎉💐🎉💐🥰🥰🥰🥰😘😘😘❤️❤️❤️❤️🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥
ReplyDeleteKeep it up
ReplyDeleteThnk you
Delete