जय और सचिन की आखिरी मुलाकात


जय सचिन के घर जाकर ज़ोर ज़ोर से दरवाज़ा बजाने लगता है
सचिन दरवाज़ा खोलता है।।
अरे जय तुम..... कैसे हो। इतना कह कर सचिन जय को गले लगाने के लिए आगे बढ़ता है, मगर जय सचिन को धक्का देता है और चिल्ला कर पूछता है "अदिति से आखिरी बार तुम मिले थे। क्या किया?? तुमने उसके साथ??"... 

सचिन जय को शांति से बैठने के लिए कहता है, और कहता है कि "जय आज अदिति की फिकर हो रही है।जब वो ज़िंदा थी तब नहीं हुई? कितनी बदली अदिति तुम्हारे लिए...और एक तुम कल भी वैसे थे आज भी वैसे ही हो। तुम्हे बातों और इंसान को समझना नहीं आता"। 

और हां जय एक बात और :-
"जहां प्यार होता, वहीं झुकाव होता है, 
वरना अकड़ भरी इस दुनिया में, कहां कोई बदलाव होता है"

और सचिन कहता है "हाँ! मैं अदिति से मिलने गया था । क्यूँकि मुझे डर था कि अदिति तुम्हारी शादी की खबर सुन कर कुछ गलत ना कर ले, सिर्फ उसे समझाने उसके घर गया था"।

जय पलट कर पूछता है कि "समझाने गया था या प्यार करता था?" इस पर सचिन ने कहा "प्यार करता था और प्यार तेरी समझ के बाहर है" तू क्या जाने सच्चा प्यार जय, तुझे पता भी है अदिति तेरे पास आने के लिए सड़क पर पागलों की तरह पैदल ही निकल गई थी। मैने अदिति को समझाया और अपने साथ चलने के लिए मनाया
तेरे पास ही लाने ही वाला था, हम दोनों अदिति के घर से निकल ही रहे थे कि अचानक अदिति ने मुझसे कहा कि सचिन मझे जय को एक डायरी देनी है जो मैं घर भूल आयी हूँ। और अदिति गाड़ी से उतर कर सड़क पार करके डायरी लेने घर जा ही रही थी कि अचानक एक गाड़ी ने उसे पीछे से टक्कर मार दी।  मैं अदिति को अस्पताल ले कर जा रहा था कि ज्यादा खून बह जाने की वजह से बीच रास्ते में उसकी मौत हो गई"।
ये बताते बताते सचिन की आँखों में आंसू आजाते हैं, और वो कहता है "अदिति तुमसे बहुत प्यार करती थी जय।
तुम किस्मत वाले थे जय..... जो तुम्हे सच्चा प्यार  करने वाली अदिति जैसी लड़की मिली, पर तुम समझ नहीं पाए, और तो और जय तुमने तो अदिति से बात तक करनी छोड़ दी थी, फिर जीकर करती भी क्या बेचारी"

"मरने के बाद रोने से अच्छा है, जीते जी बात की जाए
थोड़ी देर ही सही, अपनों से मुलाकात की जाए"

जय रोते रोते सचिन को डायरी दिखता है, और कहता है "अदिति मझे ये  डायरी देना चाहती थी। जिसमें अदिति का हाल उसकी शब्दों के द्वारा साफ साफ पढ़ा जा सकता था"।

सचिन जय को संभलता है , और कहता है कि जय जब इंसान होता है तब क़दर नहीं होती। अब जब तुम्हे अपनी गलती का एहसास है तो अदिति इस दुनिया में नहीं है। अदिति हमारे बीच ही है हम सबके दिल में। 
जय रोते हुए कहता है.. की सचिन मै उससे माफी भी नहीं मांग पाया"। 

इस पर सचिन ने कहा कि जय  "अदिति ने तुम्हे उस दिन ही माफ कर दिया था। मरने से पहले अदिति ने मुझसे कहा था कि जय से कहना कि मैने जय को माफ किया, अदिति बहुत साफ दिल की थी जय"। 

जय अब सचिन के गले लग कर ...खूब रोने लगता है।

किसी ने सच ही कहा है। कि ताजमहल सबने देखा है पर मुमताज़ ने नहीं।

"इसलिए वक़्त रहते अपनों की कद्र करो।
आप लोग भी अपनों को वक़्त रहते प्यार और सम्मान दे। 
क्यूंकि जब इंसान अपनो को वक़्त नहीं देता
तो अपनों के बीच से वक़्त निकल जाता है।"

उम्मीद है आपको ये कहानी पसन्द आई होगी। 
अपना फीडबैक ज़रूर दीजिए comment box में... 🙏
मेरे quotes पढ़ने के लिए आप मुझे Instagram पर follow कर सकते हैं @quotestjs पर...

धन्यवाद 🙏

अगर आपने कहानी का पहला पार्ट नहीं पढ़ा है तो नीचे दिए लिंक पर टैप कर के पढ़ सकते है👇


कहानी का दूसरा हिस्सा👇


Want to Read More? Follow Me👇

5 comments:

गुमनाम दोस्त

कोई तुमसे पूछे कौन हूं मैं, तुम कह देना कोई खास नहीं    एक दोस्त है पक्का कच्चा सा, एक झूठ है आधा सच्चा सा जस्बात से ढका  एक परदा है एक बहान...