जुनून में सुकून

"जुनून " ये ऐसा शब्द है
जिसका सभी की ज़िन्दगी में अलग अलग मतलब होता है।
या यूं कहे कि सबके लिए जुनून को लेकर अपनी अलग अलग ही परिभाषा है।
तो आज हम जो कहानी जानने वाले है उसमे एक लड़की है

इस लड़की का नाम है स्नेहा !

स्नेहा बहुत ही शांत स्वभाव की लडकी है, उसे कम बोलना पसंद है।
लेकिन जैसी  बाहर की दुनिया के लिए शांत है उसके अंदर उतना ही शोर है

बाहर जितनी शांति है
अंदर उतना शोर है।
अकेली मै नहीं,
 शायद कोई ओर है।
दुनिया कहे ये तो कोई रोग है।

ख़ैर स्नेहा को किसी के कहने पर ज़रा भी बुरा नहीं लगता है,
इतनी कम उम्र में मानो, उसे दुनिया भर की समझदारी थी
थोड़ी शांत , पर बहुत प्यारी थी।

स्नेहा के घर में उसके पिता और माता जी  होते है ।
और दोनों काम करते है


पिता जी एक किराने की दुकान पर समान तोलने का काम करते है,
और माता जी घरो में साफ सफाई का काम करती है,
जिसने उनके घर का खर्चा चलता है।

स्नेहा दिन में स्कूल से आने के बाद अपने घर का काम किया करती थी,
और अपनी मां के आने से पहले काफी काम निपटा दिया करती थी।
और शाम को अपने पिता के पास दुकान पर जाया करती थी और उनके साथ भी काम में हाथ बटाया करती थी और  रात में अपनी पढ़ाई किया करती थी।

स्नेहा के माता पिता उसके लिए चिंतित थे। क्युकी स्नेहा को अनिंद्रा ( रातों में नींद ना आने की बीमारी)

वैसे वो किसी से ज्यादा बात पसंद नहीं करती थी, मगर उसके अंदर बातो का तूफान चला करता था।

स्नेहा अपने माता पिता की इकलौती बच्ची होती है। और उसके परिवार में सिर्फ मा और पापा ही है

उसके पिता जी ने उसकी पढ़ाई में किसी चीज की कमी नहीं होने दी
सब कुछ ठीक ही चल रहा था,
स्नेहा बहुत खुशमिजाज लडकी थी
और सभी से बड़े ही तमीज से बात करती है।


सब कुछ ठीक चल रहा था कि अचानक उस परिवार की खुशी को मानो किसी की नज़र लग गई हो

एक  सड़क हादसे में स्नेहा के माता-पिता की मौत हो जाती है, और स्नेहा अकेली हो जाती है।

स्नेहा के माता पिता के  देहांत के बाद स्नेहा के घर पर किराने की दुकान का मालिक आता है

और वह स्नेहा को अपने पिताजी की जगह काम करने का ऑफर देते है
स्नेहा अपने पिता जी की तरह मेहनत करके कमाने वाली लड़की होती है।

वह अगले दिन से दुकान पर पहुंच जाती है। लेकिन कुछ दिन बाद काम पर जाना छोड़ देती है 


वो अगले दिन काम पर क्यों नहीं जाती?
अब अपने घर को उसे खुद ही संभालना है।।
आखिर स्नेहा काम पर जाना क्यों छोड़ देती है???? 

 इस बात को हम जनानेगे कहानी के दूसरे हिस्से में.........



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