दूरी भी जरूरी थी।

जब मै उसको खोना नहीं चाहती थी।
उसी पल में मैने उसको खो दिया,
एक प्यारा दोस्त या ज़िन्दगी
हर रिश्ते में उसी का नाम दिया।
मगर दूरी भी ज़रूरी थी।

सच कहूं तो दूरी ही जरूरी थी।
थोड़ी इस दिल की मज़बूरी
थोड़ी दिमाग की मंजूरी थी।
मैंने उसे तब खोया, जब 
वो मेरे लिए बहुत जरूरी थी।
मगर दूरी भी जरूरी थी।

आंसू छुपा लिए थे उससे
जब वो मेरे सामने खड़ी थी
और पूछा उसने क्या ? ये सब में मेरी मंजूरी थी।
और कह दिया,  मैंने कि हां
अलग होने में मेरी मंजूरी थी।
 मगर दूरी भी जरूरी थी।

कुछ इस क़दर अपने दिल की दूरी थी।
उस झूठ को सच मानना उसकी भी,
और मेरी भी मंजूरी थी।
कुछ ऐसी ये मज़बूरी थी
मगर दूरी भी जरूरी थी।

अलग होने पर अब उसका दिल भी राज़ी है
मगर इस दिल की चोट आज भी ताज़ी है

4 comments:

  1. Beautiful poetry. I love the lines, the phrases are so deep, meaningful yet clean. It keeps you going & makes you think of people in your own life.
    Great work.
    Applause.

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