जुनून में सुकून 3

हेलो दोस्तो।

आज कहानी के इस हिस्से में जानेंगे की स्नेहा की डायरी पढ़ कर आदित्य के होश आखिर क्यों उड़ जाते है?

डायरी में स्नेहा के माँ -पापा की फोटो होती है, जिन्हे देख कर आदित्य के चेहरे का रंग उड़ जाता है।
जिसकी वजह ये होती है कि एक बार जब आदित्य युवावस्था में होता है। तब वो मस्ती-मस्ती में कार लेकर रोड पर निकल जाता है, और कार काफी तेज रफ्तार में चला रहा होता है। उसकी कार की रफ्तार इतनी तेज़ होती है कि दो इंसानों से उसकी कार टकरा जाती है। और आदित्य जब तक ब्रेक लगता तब तक उन दोनों को कार टक्कर मार चुकी होती है। वो सड़क के दूसरे किनारे पर खून में लथपथ पड़े थे। आदित्य ने जा कर देखना भी चाहा लेकिन उसके दोस्त उसे जबरदस्ती वहां से लेे गए ताकि कोई फस न जाये।
आदित्य उस डायरी में ये भी पढ़ता है कि स्नेहा को क्या पसंद है क्या नहीं... स्नेहा की पसंद और नापसंद के साथ-साथ स्नेहा की ज़िन्दगी के सारे बुरे वक़्त को पढ़ता है। और साथ में ये भी पढ़ता है कि स्नेहा चाहती है  उसकी एक बुक पब्लिश हो, और स्नेहा की मन की सारी बाते उस डायरी में लिखी होती है।

अगले दिन आदित्य उससे मिलने जाता है और स्नेहा परेशान हो रही होती है। आदित्य उसकी परेशानी की वजह पूछता है। स्नेहा उसे अपनी डायरी के बारे में बताती है की उसकी डायरी नहीं मिल रही, जिसे वो जान से लगा कर रखती है ।

आदित्य ना जाने क्यों मगर एक अनजाने डर की वजह से उसे ये नहीं बता पाता, की उसकी डायरी आदित्य के पास ही है, मगर वो स्नेहा को यकीन दिलाता है कि वो उसकी डायरी ज़रूर ढूँढ लेगा और वो परेशान ना हो। स्नेहा वापस से अपने काम पर जाने लगती है। लेकिन उसका मन काम में नहीं होता, क्यूंकि उसका दिल तो उस डायरी के बारे में ही सोचता रहता है।

कुछ दिन बाद स्नेहा का जन्मदिन आ जाता है। आदित्य स्नेहा को उसके जन्मदिन पर बाहर घूमने जाने के लिए पूछता है। लेकिन स्नेहा मना कर देती है। क्युकी बीमारी की वजह से उसकी पहले ही काफी छुट्टीयां हो चुकी होती है।
स्नेहा के मना करने पर आदित्य उससे ज़िद नहीं करता उल्टा उसकी बात को समझता है। और उसकी बात मान भी लेता है। लेकिन (डोमिनोज़) आउटलेट के मालिक को पैसे दे कर आउटलेट पर ही अच्छे से डेकोरेशन करवा देता है। स्नेहा जब अपने जन्मदिन वाले दिन आउटलेट पर पहुँचती है, सब उसको जन्मदिन की बधाई देते है। और आज उसे कोई भी काम करने के लिए नहीं कहा जाता। 

स्नेहा को हैरानी तो तब होती है, जब स्नेहा देखती है कि आदित्य जो खुद इतने पैसे वाले घर से है की अगर चाहे तो पूरा आउटलेट खरीद ले वो आदित्य आज उसकी जगह ऑर्डर लेने का काम कर रहा  है, जब स्नेहा आदित्य के पास जाती है तो आदित्य उससे पूछता है, "मैम आपका ऑर्डर प्लीस??"

स्नेहा की आंख में आंसू होते है, क्यूंकि उसको अभी तक किसी ने ऐसा ट्रीट नहीं किया होता, और आदित्य स्नेहा को उसकी डायरी दिखा के बोलता है, "ये लो तुम्हारा गिफ्ट", अपनी खोई हुई डायरी देख वह बहुत खुश होती है, और खुशी से आदित्य को गले लगा लेती है।

आदित्य कहता है कि एक और सरप्राइज है तुम्हारे लिए मगर उसके लिए तुम्हे एक इजाज़त देनी होगी और थोड़ा-सा  इंतज़ार करना पड़ेगा।  
स्नेहा पूछती है "इजाज़त कैसी?", तब आदित्य उससे पूछता है "मुझे कुछ दिनों के लिए अपनी डायरी दे सकती हो??, देखो तुम्हारी डायरी मैं पढ़ चूका हूँ, मगर कुछ ऐसा है जिसे तुम्हे देने के लिए मुझे तुम्हारी डायरी चाहिए होगी" अब स्नेहा भरोसा तो करने ही लगी थी, तो उसने आदित्य को डायरी सौंप दी, मगर अब सवाल आता है, कि आखिर ऐसा क्या था की आदित्य को उसके लिए स्नेहा की डायरी की ज़रूरत थी????
यह बात हम कहानी के अगले हिस्से में जानेगे।
**************************************************
अगर अपने इससे पहले की कहानी नहीं पढ़ी है तो नीचे दिए लिंक से पढ़े। और अपना फीडबैक दे



******************************************************
उम्मीद है आपको ये कहानी पसन्द आई होगी। 
अपना फीडबैक ज़रूर दीजिए comment box में... 🙏
मेरे quotes पढ़ने के लिए आप मुझे Instagram पर follow कर सकते हैं @quotestjs पर...

धन्यवाद 🙏



4 comments:

  1. I am waiting for your next story.
    You are very good writter.💐🎉💐🎉💐

    ReplyDelete
  2. Wow! That's a great piece 👌 Brilliant writing ✨

    ReplyDelete
  3. Keep it up.... waiting for next part

    ReplyDelete

गुमनाम दोस्त

कोई तुमसे पूछे कौन हूं मैं, तुम कह देना कोई खास नहीं    एक दोस्त है पक्का कच्चा सा, एक झूठ है आधा सच्चा सा जस्बात से ढका  एक परदा है एक बहान...