वक्त की बात

     वक्त की बात

वक्त वक्त की बात है
आज दुख: की, तो कल फूलो वाली रात है।

एक डोली उठी, तारो वाली जगमगाती रात है।
तो कभी किसी अपने के साथ बीती, आखिरी रात है।

कोई रात अकेली कटी,
तो किसी से सालों बाद हुई मुलाकात है।

किसी रात में प्यार की मौत,
तो कभी किसी से हो रहे, प्यार की ये पहली रात है।

किसी के झूठे वादे,भी सच्चे
तो किसी के सच्चे वादे भी लगते, जैसे फीके जस्बात है।

कभी खुद अपनो की राख पर बैठ रोए सारी रात है,
कभी जश्न मे बीती पूरी रात है।

अपनो से मिले गम की सौगात है
तो कभी ग़ैर के साथ भी,अपनो वाली बात है।

कोई इंसान अच्छा या बुरा नहीं,
ये तो बस वक्त वक्त की बात है।

बुरे तो बस उसके हालात है,
आज दुख की तो कल खुशी वाली रात है।



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