निभाना कोई नही चाहता

प्यार सब पाना चाहते है
पर निभाना कोई नही चाहता।

पास सब आना चाहता है,
हक भी सब जताते है,
पर हक देना, कोई भी चाहता...

दर्द सबके दिल में है,
मगर बताना कोई नही चाहता।।

रूठे है सब इस दुनिया में,
मगर मनाना कोई नही चाहता।।

अकेले है सब,
पर साथ कोई आना नही चाहता।।

खुदकुशी कर लेते है, मगर
खुद की खुशी के लिए,  
खुद को जानना तक भी,कोई नही चाहता।।

दिल तो सबका दुखा है,मगर इस दुनिया में,
दूसरी बारी आजमाना कोई नही चाहता।।

उलझे हैं सब यहां मगर, 
सुलझाना कोई नही चाहता।।

सुनाते है सब,
मगर सुनना कोई नही चाहता।।

कहते है सब हम तुम्हारे साथ है,
मगर साथ कोई देना भी नही चाहता।।

प्यार पाना तो सब चाहते है
पर निभाना कोई नही चाहता।।


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6 comments:

  1. बहुत सुंदर कविता है, पर कोई बताना नहीं चाहता 😄💐❤️

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  2. Bhut acha h taruna ek ek line bhut achi h 🤞🏻👌🏻👏🏻

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  3. अच्छा लिखा है आपने।

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