गुमनाम दोस्त

कोई तुमसे पूछे
कौन हूं मैं,
तुम कह देना
कोई खास नहीं 
 
एक दोस्त है
पक्का कच्चा सा,
एक झूठ है
आधा सच्चा सा

जस्बात से ढका 
एक परदा है
एक बहाना कोई
अच्छा सा,

जीवन का एक ऐसा साथी है
जो पास होकर भी
पास नहीं 

कोई तुमसे पूछे
कौन हूं मैं,
तुम कह देना
कोई खास नहीं ।

एक साथी जो कुछ 
अनकही सी बात कह जाता है।

यादों में जिसका
एक धुंधला सा चेहरा रह जाता है।

यूं तो उसके ना होने का 
मुझे कोई गम नही

पर कभी कभी आंखों से 
आंसू बनकर बह जाता है

यू रहता तो मेरे जहन में है, 
पर नजरों को उसकी तलाश नहीं

कोई तुमसे पूछे
कौन हूं मैं,
तुम कह देना
कोई खास नहीं 

साथ बनकर जो रहता है
वो दर्द बांटता जाता है

भूलना जो चाहूं उसको,
तो यादों में वो आ जाता है

अकेला महसूस करू,
तो सपनो में वो आ जाता है

मै साथ खड़ा हूं सदा तुम्हारे
कहकर साहस दे जाता है

ऐसे ही रहता है साथ मेरे 
उसकी मौजूदगी का एहसास नही

कोई तुमसे पूछे
कौन हूं मैं,
तुम कह देना
कोई खास नहीं 

मै और मेरा अकेलापन

मै और मेरा अकेलापन

मेरे साथ मेरा अकेलापन रहता है।
चिढ़ाते हुए, मुझे एक बात वो कहता है।।
चाहे कितने भी कोशिश कर लो तुम महफीले सजाने की।
चाहे कितनी भी कोशिश कर लो तुम हंसने और मुस्कुराने की।।
इस बेरहम दुनिया में तुम कुछ नही कर पाओगे।
हस्ते हुए चेहरे के पीछे भी बस आंसू ही छुपाओगे।।
ये दुनिया मतलबी है साथ छोड़ देती है।
जरूरत पड़ने पर मुंह मोड़ लेती है।।
इनसे अच्छा तो मैं हूं।
अंत तक साथ निभाऊंगा।।
जब कोई पास ना हो तेरे।
तो मैं ही पास में पाऊंगा।।
इस दुनिया में मै ही तो हूं।
जो तुझे समझता हूं।।
एक मै ही तो हु जो तेरे दर्द पर नही हंसता हूं।
वरना ये दुनिया वाले ओरो के दर्द पर हंसते है।।
दुःख बांटने से तो गए, जख्मों पर नमक छिड़कते है।
वहां कितनी भी कोशिश कर लो, तुम किसी का साथ नही पा पाओगे।
अकेले थे, अकेले हो और अकेले ही रह जाओगे।।

एक निशानी हूं मैं

 रख सको तो एक निशानी हूं मैं
खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूं मैं
रोक ना पाए जिसको ये सारी दुनिया
वो एक बूंद आंख का पानी हूं मैं

सबको प्यार देने की आदत है हमे
अपनी अलग पहचान बनाने की आदत हैं हमे
कितना भी गहरा जख्म दे कोई
उतना ही ज्यादा मुस्कुराने की आदत है हमे

इस अजनबी दुनिया में अकेला ख्वाब हूं मैं
सवालों से खफा छोटा सा जवाब हूं मैं
जो समझ ना सके मुझे उनके लिए कौन
जो समझ गए उनके लिए खुली किताब हूं मैं

आंखो से देखोगे तो खुश पाओगे
दिल से पूछोगे तो दर्द का सैलाब हूं मैं
अगर रख सको तो एक निशानी हूं मैं
खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूं मैं


कौन हूं मै??

जिंदगी को देख हैरान हूं मै
हां सच है, बहुत परेशान हू 
चुप हूं अगर मै,
तो सबको लगता है नादान हूं मैं..

दुनिया की इस रीत से शायद अनजान हूं मै
खामोशी जरूरी है, मगर दर्द मुझे भी होता है
क्युकी आखिर में इंसान हूं मै..

कुछ गमों को सीए रहती हु दिल में,
दिल उदास है, फिर भी मुस्कुरा देती हु
और लोगो को लगता है, खुश हूं मै

लिख कर दर्द बयां करना,
अब जरूरी है जैसे
और सबको लगता है
इतना दर्द कैसे? लिख लेती हूं मै

ना शिकायत किसी से,
ना जरूरत किसी की,
पन्नो पर उतरते है, कुछ जस्बात मेरे,
जैसे लिखने के लिए बनी हूं मै

अंत में बस ये ही बताना है की कौन हूं मैं
 ये मै ,कोई और नहीं,
हर एक के अंदर छुपा दर्द हूं, मै

कुछ लिख कर बता जाती हूं,
कुछ यूं बेवजह हक जता देती हूं
दिल टूटने पर भी, 
जो जिंदा लाश है, वो इंसान हूं मै

अगर कविता आपको पसंद आई तो अपना फीडबैक कॉमेंट बॉक्स में जरूर दे,
और कोट्स और शायरी पढ़ने के लिए इंस्टाग्राम पेज को फॉलो कर सकते है।

Share kare 😊



निभाना कोई नही चाहता

प्यार सब पाना चाहते है
पर निभाना कोई नही चाहता।

पास सब आना चाहता है,
हक भी सब जताते है,
पर हक देना, कोई भी चाहता...

दर्द सबके दिल में है,
मगर बताना कोई नही चाहता।।

रूठे है सब इस दुनिया में,
मगर मनाना कोई नही चाहता।।

अकेले है सब,
पर साथ कोई आना नही चाहता।।

खुदकुशी कर लेते है, मगर
खुद की खुशी के लिए,  
खुद को जानना तक भी,कोई नही चाहता।।

दिल तो सबका दुखा है,मगर इस दुनिया में,
दूसरी बारी आजमाना कोई नही चाहता।।

उलझे हैं सब यहां मगर, 
सुलझाना कोई नही चाहता।।

सुनाते है सब,
मगर सुनना कोई नही चाहता।।

कहते है सब हम तुम्हारे साथ है,
मगर साथ कोई देना भी नही चाहता।।

प्यार पाना तो सब चाहते है
पर निभाना कोई नही चाहता।।


Instagram.  पर follow करने के लिए tap kre Instagram par



कोरोना का काल

कोरोना का  ये ,काल है।
जग में हुआ बुरा हाल है।
वोहान (चाइना) ने चलाया खंजर है।
मौत के दौर सा हो गया, चारो तरफ का मंजर है।

इंसान अपने ही घर में कैद परिंदा सा है।
तो किसी के घर में फैला मातम सा है।
कोई छत के नीचे, निराश होकर बैठ गया है।
तो कोई चिता में लगी,आग के नीचे लेट गया है।

कोई उदास है बेरोजगारी के चलते,
ये कैसे बीमारी है,(सोशल डिस्टेंसिंग की वजह से)
जब मौत पर भी, अपने गले तक नहीं हैं मिलते।
 
किसकी अंतिम विदाई है,
तो ना जाने अगली बारी, किसकी आई है
देहांत की खबर, अब हर जगह से आई है
किसी को घर में तड़पते देख रहे है,
(ऑक्सीजन की कमी की वजह से)
तो ना जाने कितनो की अर्थी  खुद डॉक्टरों ने जलाई है

किसकी गलती है, किसकी नहीं,
ना जाने कितनो को इस गलती की सजा सुनाई है।
अपनो से ही दूर हो गए, ऐसी क्या रुसवाई है।
हर तरफ, इस बीमारी ने,ये कैसी आफत मचाई है।

डॉक्टर नर्स भी परेशान है,
किस पर दे सबसे ज्यादा ध्यान,
हर तरफ तो तड़प रहा है इंसान ।
ना कोई अप्रोच, अब तो  पैसा भी ना आता काम है।

अब भी किसी को बाहर जाना है
तो किसी के लिए बीमारी का ड्रामा है, ये बहाना है
खुद ही सोचो, कितने लोग चले गए
क्या आपको भी ऊपर जाना है..??
(जो लोग अब भी मज़ाक समझते है इस बीमारी को )

कोरोना का ये काल है
जग में मचा बुरा हाल है
अंत में बस इतना ही, कि
घर में रहना है, बीमारी को पास ना लाना है
ना ही खुद,कोरोना से मिलने बाहर जाना है।




उम्मीद है आपको poetry अच्छी लगी होगी।  और poem quotes read karne k leye aap neche deye page ko follow kre



उम्मीद है कि आप सभी स्वस्थ होंगे, ऊपर वाले की कृपा आप सभी पर बनी रहे।
एवम जिनके अपने नहीं रहे उनके लिए सहानुभूति , एवम मै प्रार्थना करती हू कि भगवान  उनकी आत्मा को शांति दे।🙏

लड़की का जीवन ऐसा क्यों???

ज़िंदगी मिली है एक, तो बार-बार सोचूं क्यों?
कभी किसी रिश्ते से,
तो कभी किसी अजनबी से डरना क्यों??
आज़ाद पंछी की तरह मै, फिरू ना क्यों?
आखिर लड़की का जीवन इतना कठिन है क्यों?

दुनिया की सोच इतनी छोटी है, क्यों?
और,मैं अगर बदलाव की बात करू,
तो उस बदलाव के लिए, मेरी उम्र कम है क्यों??
और अगर उम्र कम है,तो समाज में बालविवाह होते है क्यों???
आखिर लड़की का जीवन ऐसा होता है क्यों???

ज़िंदगी जीने का हक़ देता है, ये रब सबको,
फिर सिर्फ लड़कियों के हक़ को मारते हैं क्यों??
आखिर लड़की का जीवन इतना कठिन है क्यों???

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का फिर ये झूठा नारा क्यों?
पढ़ने वाले हाथो में किताब की जगह, मेंहदी और
शादी का जोड़ा देते हो क्यों??
आखिर लड़की का जीवन इतना बेबस है क्यों???

जब ज़िंदगी मिली एक, तो बार—बार सोचना क्यों?
दर्द भरी आवाज के पीछे, झूठी हसी से हंसना है क्यों??
जब काबिल बन कर खुद को संभाल सकती है,
फिर दुनिया की फिकर, या शादी की, ज़िद्दी है क्यों??
आखिर लड़की का जीवन इतना कठिन है क्यों?????

शादी के बाद खुद के  बजाए, पति और बच्चों के लिए जीना है,
तो फिर, जीवन दूसरे के लिए कह कर, 
खुद का जीवन जियो.. ऐसी प्रेरणा का झूठा ढोंग है क्यों??

सपनो को पूरे करवाने की बात करते है, 
फिर सपनो के आड़े, खुद ही आते है,क्यों??
आखिर में एक लड़की एक बेटी से एक पत्नी और मां का सफर ही तो तय करती है, 
उसकी  ज़िंदगी केवल इतनी सी ही,क्यों??

एक लड़की, एक बहु बन कर सारा घर है संभाले,
फिर भी वो बेरोजगार क्यों? 
ज़िंदगी का पूरा सफर सिर्फ दूसरे के लिए ही जीना है क्यों???
आखिर एक लडकी का जीवन इतना कठिन है क्यों??
जब ज़िंदगी एक मिली है, तो बार बार सोचना है क्यों??

मां बन कर बच्चों को संभाले, फिर सिर्फ पिता का नाम ही हर जगह आता है क्यों??
अच्छा करे तो पिता का नाम, फिर तानो में सिर्फ मां का नाम ही क्यों?
आखिर एक लडकी का जीवन इतना कठिन है क्यों??
जब ज़िंदगी एक मिली है, तो बार बार सोचना ही क्यों??

देवी या मां के रूप में पूजते है जिसको,
फिर बलात्कार के अपराध इतने होते है क्यों??
आखिर एक लडकी का जीवन इतना कठिन है क्यों??



वक्त की बात

     वक्त की बात

वक्त वक्त की बात है
आज दुख: की, तो कल फूलो वाली रात है।

एक डोली उठी, तारो वाली जगमगाती रात है।
तो कभी किसी अपने के साथ बीती, आखिरी रात है।

कोई रात अकेली कटी,
तो किसी से सालों बाद हुई मुलाकात है।

किसी रात में प्यार की मौत,
तो कभी किसी से हो रहे, प्यार की ये पहली रात है।

किसी के झूठे वादे,भी सच्चे
तो किसी के सच्चे वादे भी लगते, जैसे फीके जस्बात है।

कभी खुद अपनो की राख पर बैठ रोए सारी रात है,
कभी जश्न मे बीती पूरी रात है।

अपनो से मिले गम की सौगात है
तो कभी ग़ैर के साथ भी,अपनो वाली बात है।

कोई इंसान अच्छा या बुरा नहीं,
ये तो बस वक्त वक्त की बात है।

बुरे तो बस उसके हालात है,
आज दुख की तो कल खुशी वाली रात है।



दूरी भी जरूरी थी।

जब मै उसको खोना नहीं चाहती थी।
उसी पल में मैने उसको खो दिया,
एक प्यारा दोस्त या ज़िन्दगी
हर रिश्ते में उसी का नाम दिया।
मगर दूरी भी ज़रूरी थी।

सच कहूं तो दूरी ही जरूरी थी।
थोड़ी इस दिल की मज़बूरी
थोड़ी दिमाग की मंजूरी थी।
मैंने उसे तब खोया, जब 
वो मेरे लिए बहुत जरूरी थी।
मगर दूरी भी जरूरी थी।

आंसू छुपा लिए थे उससे
जब वो मेरे सामने खड़ी थी
और पूछा उसने क्या ? ये सब में मेरी मंजूरी थी।
और कह दिया,  मैंने कि हां
अलग होने में मेरी मंजूरी थी।
 मगर दूरी भी जरूरी थी।

कुछ इस क़दर अपने दिल की दूरी थी।
उस झूठ को सच मानना उसकी भी,
और मेरी भी मंजूरी थी।
कुछ ऐसी ये मज़बूरी थी
मगर दूरी भी जरूरी थी।

अलग होने पर अब उसका दिल भी राज़ी है
मगर इस दिल की चोट आज भी ताज़ी है

जुनून में सुकून 3

हेलो दोस्तो।

आज कहानी के इस हिस्से में जानेंगे की स्नेहा की डायरी पढ़ कर आदित्य के होश आखिर क्यों उड़ जाते है?

डायरी में स्नेहा के माँ -पापा की फोटो होती है, जिन्हे देख कर आदित्य के चेहरे का रंग उड़ जाता है।
जिसकी वजह ये होती है कि एक बार जब आदित्य युवावस्था में होता है। तब वो मस्ती-मस्ती में कार लेकर रोड पर निकल जाता है, और कार काफी तेज रफ्तार में चला रहा होता है। उसकी कार की रफ्तार इतनी तेज़ होती है कि दो इंसानों से उसकी कार टकरा जाती है। और आदित्य जब तक ब्रेक लगता तब तक उन दोनों को कार टक्कर मार चुकी होती है। वो सड़क के दूसरे किनारे पर खून में लथपथ पड़े थे। आदित्य ने जा कर देखना भी चाहा लेकिन उसके दोस्त उसे जबरदस्ती वहां से लेे गए ताकि कोई फस न जाये।
आदित्य उस डायरी में ये भी पढ़ता है कि स्नेहा को क्या पसंद है क्या नहीं... स्नेहा की पसंद और नापसंद के साथ-साथ स्नेहा की ज़िन्दगी के सारे बुरे वक़्त को पढ़ता है। और साथ में ये भी पढ़ता है कि स्नेहा चाहती है  उसकी एक बुक पब्लिश हो, और स्नेहा की मन की सारी बाते उस डायरी में लिखी होती है।

अगले दिन आदित्य उससे मिलने जाता है और स्नेहा परेशान हो रही होती है। आदित्य उसकी परेशानी की वजह पूछता है। स्नेहा उसे अपनी डायरी के बारे में बताती है की उसकी डायरी नहीं मिल रही, जिसे वो जान से लगा कर रखती है ।

आदित्य ना जाने क्यों मगर एक अनजाने डर की वजह से उसे ये नहीं बता पाता, की उसकी डायरी आदित्य के पास ही है, मगर वो स्नेहा को यकीन दिलाता है कि वो उसकी डायरी ज़रूर ढूँढ लेगा और वो परेशान ना हो। स्नेहा वापस से अपने काम पर जाने लगती है। लेकिन उसका मन काम में नहीं होता, क्यूंकि उसका दिल तो उस डायरी के बारे में ही सोचता रहता है।

कुछ दिन बाद स्नेहा का जन्मदिन आ जाता है। आदित्य स्नेहा को उसके जन्मदिन पर बाहर घूमने जाने के लिए पूछता है। लेकिन स्नेहा मना कर देती है। क्युकी बीमारी की वजह से उसकी पहले ही काफी छुट्टीयां हो चुकी होती है।
स्नेहा के मना करने पर आदित्य उससे ज़िद नहीं करता उल्टा उसकी बात को समझता है। और उसकी बात मान भी लेता है। लेकिन (डोमिनोज़) आउटलेट के मालिक को पैसे दे कर आउटलेट पर ही अच्छे से डेकोरेशन करवा देता है। स्नेहा जब अपने जन्मदिन वाले दिन आउटलेट पर पहुँचती है, सब उसको जन्मदिन की बधाई देते है। और आज उसे कोई भी काम करने के लिए नहीं कहा जाता। 

स्नेहा को हैरानी तो तब होती है, जब स्नेहा देखती है कि आदित्य जो खुद इतने पैसे वाले घर से है की अगर चाहे तो पूरा आउटलेट खरीद ले वो आदित्य आज उसकी जगह ऑर्डर लेने का काम कर रहा  है, जब स्नेहा आदित्य के पास जाती है तो आदित्य उससे पूछता है, "मैम आपका ऑर्डर प्लीस??"

स्नेहा की आंख में आंसू होते है, क्यूंकि उसको अभी तक किसी ने ऐसा ट्रीट नहीं किया होता, और आदित्य स्नेहा को उसकी डायरी दिखा के बोलता है, "ये लो तुम्हारा गिफ्ट", अपनी खोई हुई डायरी देख वह बहुत खुश होती है, और खुशी से आदित्य को गले लगा लेती है।

आदित्य कहता है कि एक और सरप्राइज है तुम्हारे लिए मगर उसके लिए तुम्हे एक इजाज़त देनी होगी और थोड़ा-सा  इंतज़ार करना पड़ेगा।  
स्नेहा पूछती है "इजाज़त कैसी?", तब आदित्य उससे पूछता है "मुझे कुछ दिनों के लिए अपनी डायरी दे सकती हो??, देखो तुम्हारी डायरी मैं पढ़ चूका हूँ, मगर कुछ ऐसा है जिसे तुम्हे देने के लिए मुझे तुम्हारी डायरी चाहिए होगी" अब स्नेहा भरोसा तो करने ही लगी थी, तो उसने आदित्य को डायरी सौंप दी, मगर अब सवाल आता है, कि आखिर ऐसा क्या था की आदित्य को उसके लिए स्नेहा की डायरी की ज़रूरत थी????
यह बात हम कहानी के अगले हिस्से में जानेगे।
**************************************************
अगर अपने इससे पहले की कहानी नहीं पढ़ी है तो नीचे दिए लिंक से पढ़े। और अपना फीडबैक दे



******************************************************
उम्मीद है आपको ये कहानी पसन्द आई होगी। 
अपना फीडबैक ज़रूर दीजिए comment box में... 🙏
मेरे quotes पढ़ने के लिए आप मुझे Instagram पर follow कर सकते हैं @quotestjs पर...

धन्यवाद 🙏



जुनून में सुकून 2

दोस्तों! इस हिस्से में हम ये जानेंगे की, स्नेहा काम पर अगले दिन क्यों नहीं जाती?? 
स्नेहा काम पर जब पहले दिन जाती है तो किराने की दुकान का मालिक उसे गलत तरह से छुता है और स्नेहा के साथ गलत करने की कोशिश करता है।

स्नेहा वहाँ से नौकरी छोड़ देती है, और दूसरी नौकरी की तलाश करने लगती है। कुछ दिन तक स्नेहा को नौकरी नहीं मिलती, तब तक स्नेहा घर में अपनी डायरी में लिखना शुरू करती है, और वो बाते लिखती है, जो काफी अरसे से उसके जहन में थी, उन सभी बातो को स्नेहा अपने शब्द दे देती है।
स्नेहा को लिखने का धीरे धीरे आदत हो जाती है, और वो आदत कुछ इस क़दर बढ़ जाती है, की वो जिस रात ना लिखे उसे चैन नहीं मिलता।

एक रोज़ जब वह नौकरी की तलाश में निकलती है तो उसे किसी तरह डॉमिनोज में नौकरी मिल जाती है, वहाँ उसे ऑर्डर लेने के काम मिल जाता है। स्नेहा दिन में काम किया करती, और रात में अपनी डायरी लिखा करती थी।
उसकी जिदंगी जैसे नौकरी और डायरी के बीच ही सिमटी हुई थी, ना कोई दोस्त ना कोई प्यार।
अपने मां-पापा की मौत के बाद स्नेहा गुमसुम रहने लगी थी। लेकिन शायद उसका ये अकेलापन जल्द ही भरने वाला था।

एक रोज़ एक लड़का अपने कुछ दोस्तों को पार्टी देने डॉमिनोज जाता है, इस लड़के का नाम आदित्य होता है, आदित्य पिज़्ज़ा का ऑर्डर देने काउंटर पर जाता है, जैसे ही ऑर्डर देने लगता है, उसकी नजर स्नेहा पर पड़ती है, जो सबके ऑर्डर को रि-चेक कर रही होती है। 
आदित्य को स्नेहा से पहली ही नज़र में प्यार हो जाता है, और अब वो स्नेहा से मिलने के बहाने रोज़ डॉमिनोज आने लगता है, और जान बूझकर ऑर्डर स्नेहा को ही लेने को कहता है। धीरे-धीरे बातचीत करते-करते स्नेहा और आदित्य की दोस्ती हो जाती है।

अब आदित्य और स्नेहा अब बहार भी मिलने लगते हैं, इसी बीच कुछ दिन स्नेहा काम पर जा नहीं पाती, तो आदित्य परेशान हो जाता है और डॉमिनोज के आउटलेट  के मालिक से स्नेहा के घर का पता ले कर स्नेहा से मिलने जाता है।

जब वो उसके घर पहुंचता है, तो देखता है, कि वो बीमार है, और आराम कर रही है। आदित्य को अपने घर पर अचानक देख कर स्नेहा थोड़ी अनकम्फर्टेबल हो जाती है, और पूछती है "अरे! आदित्य तुम यहां क्यों आगये ?? आदित्य जवाब देता है "तुमसे मिलने आया हूँ, क्यों नहीं आ सकता क्या?" , इस पर स्नेहा हंसकर कहती हैं, "नहीं-नहीं, ऐसा नहीं है, अच्छा तुम बैठो मैं पानी लाती हूँ"।  इतना कह कर स्नेहा आदित्य के लिए पानी लेने के लिए किचन में जाती है। 
जैसे ही स्नेहा रसोई में जाती है आदित्य की नजर स्नेहा की डायरी पर पड़ती है। आदित्य उस डायरी को उठा कर पढ़ने वाला ही होता है स्नेहा तब तक पानी ले कर आ जाती है। आदित्य डायरी छिपा लेता है और अपने घर जा कर डायरी पढ़ता है। डायरी पढ़ते-पढ़ते उसके होश उड़ जाते है। 

लेकिन उस डायरी में ऐसा क्या था? ये हम कहानी के अगले हिस्से में हम जानेंगे की आदित्य डायरी में ऐसा क्या पढ़ता है?? जिससे उसके होश उड़ जाते है।

***********************************************************************************
उम्मीद है आपको ये कहानी पसन्द आयी होगी, अपना फीडबैक ज़रूर दीजिए comment box में... 🙏
मेरे quotes पढ़ने के लिए आप मुझे Instagram पर follow कर सकते हैं @quotestjs पर...

अगर किसी वजह से आपने कहानी का पहला भाग मिस किया हो तो , नीचे दिए गए  लिंक से आप पहला भाग पढ़ सकते हैं। 

जुनून में सुकून (भाग - 1)

धन्यवाद 🙏
************************************************************************************







जुनून में सुकून

"जुनून " ये ऐसा शब्द है
जिसका सभी की ज़िन्दगी में अलग अलग मतलब होता है।
या यूं कहे कि सबके लिए जुनून को लेकर अपनी अलग अलग ही परिभाषा है।
तो आज हम जो कहानी जानने वाले है उसमे एक लड़की है

इस लड़की का नाम है स्नेहा !

स्नेहा बहुत ही शांत स्वभाव की लडकी है, उसे कम बोलना पसंद है।
लेकिन जैसी  बाहर की दुनिया के लिए शांत है उसके अंदर उतना ही शोर है

बाहर जितनी शांति है
अंदर उतना शोर है।
अकेली मै नहीं,
 शायद कोई ओर है।
दुनिया कहे ये तो कोई रोग है।

ख़ैर स्नेहा को किसी के कहने पर ज़रा भी बुरा नहीं लगता है,
इतनी कम उम्र में मानो, उसे दुनिया भर की समझदारी थी
थोड़ी शांत , पर बहुत प्यारी थी।

स्नेहा के घर में उसके पिता और माता जी  होते है ।
और दोनों काम करते है


पिता जी एक किराने की दुकान पर समान तोलने का काम करते है,
और माता जी घरो में साफ सफाई का काम करती है,
जिसने उनके घर का खर्चा चलता है।

स्नेहा दिन में स्कूल से आने के बाद अपने घर का काम किया करती थी,
और अपनी मां के आने से पहले काफी काम निपटा दिया करती थी।
और शाम को अपने पिता के पास दुकान पर जाया करती थी और उनके साथ भी काम में हाथ बटाया करती थी और  रात में अपनी पढ़ाई किया करती थी।

स्नेहा के माता पिता उसके लिए चिंतित थे। क्युकी स्नेहा को अनिंद्रा ( रातों में नींद ना आने की बीमारी)

वैसे वो किसी से ज्यादा बात पसंद नहीं करती थी, मगर उसके अंदर बातो का तूफान चला करता था।

स्नेहा अपने माता पिता की इकलौती बच्ची होती है। और उसके परिवार में सिर्फ मा और पापा ही है

उसके पिता जी ने उसकी पढ़ाई में किसी चीज की कमी नहीं होने दी
सब कुछ ठीक ही चल रहा था,
स्नेहा बहुत खुशमिजाज लडकी थी
और सभी से बड़े ही तमीज से बात करती है।


सब कुछ ठीक चल रहा था कि अचानक उस परिवार की खुशी को मानो किसी की नज़र लग गई हो

एक  सड़क हादसे में स्नेहा के माता-पिता की मौत हो जाती है, और स्नेहा अकेली हो जाती है।

स्नेहा के माता पिता के  देहांत के बाद स्नेहा के घर पर किराने की दुकान का मालिक आता है

और वह स्नेहा को अपने पिताजी की जगह काम करने का ऑफर देते है
स्नेहा अपने पिता जी की तरह मेहनत करके कमाने वाली लड़की होती है।

वह अगले दिन से दुकान पर पहुंच जाती है। लेकिन कुछ दिन बाद काम पर जाना छोड़ देती है 


वो अगले दिन काम पर क्यों नहीं जाती?
अब अपने घर को उसे खुद ही संभालना है।।
आखिर स्नेहा काम पर जाना क्यों छोड़ देती है???? 

 इस बात को हम जनानेगे कहानी के दूसरे हिस्से में.........



उम्मीद है आपको ये कहानी पसन्द आई होगी। 
अपना फीडबैक ज़रूर दीजिए comment box में... 🙏
मेरे quotes पढ़ने के लिए आप मुझे Instagram पर follow कर सकते हैं @quotestjs पर...

धन्यवाद 🙏




लाज़वाब हो तुम

मेरे अल्फ़ाज़ की शायरा हो तुम।
डूबते हुए TJ's का हौसला हो तुम।
मेरे इस मिजाज़ का अंदाज़ हो तुम।
वैसे तो चेहरे से ही नहीं, बल्कि दिल से भी खूबसूरत हो तुम।
यू तो हाज़िर जवाब हो तुम।
जो भी हो आखिर लाजवाब हो तुम।
यूं तो गुस्से में आग हो तुम,
पर मेरा चिराग हो तुम।
जो भी हो आखिर लाजवाब हो तुम।
ऐसे तो चेहरे से नवाब हो तुम।
या यूं कहिए कि मेरा ख्वाब हो तुम।
वैसे तानी का तारा हो तुम।
एक प्यारा सा एहसास हो तुम।
कैसे बयां करू तुम्हे, कि क्या हो तुम।
मेरे इस गीत के अल्फ़ाज़ हो तुम।
जो भी हो आखिर लाजवाब हो तुम।


जय और सचिन की आखिरी मुलाकात


जय सचिन के घर जाकर ज़ोर ज़ोर से दरवाज़ा बजाने लगता है
सचिन दरवाज़ा खोलता है।।
अरे जय तुम..... कैसे हो। इतना कह कर सचिन जय को गले लगाने के लिए आगे बढ़ता है, मगर जय सचिन को धक्का देता है और चिल्ला कर पूछता है "अदिति से आखिरी बार तुम मिले थे। क्या किया?? तुमने उसके साथ??"... 

सचिन जय को शांति से बैठने के लिए कहता है, और कहता है कि "जय आज अदिति की फिकर हो रही है।जब वो ज़िंदा थी तब नहीं हुई? कितनी बदली अदिति तुम्हारे लिए...और एक तुम कल भी वैसे थे आज भी वैसे ही हो। तुम्हे बातों और इंसान को समझना नहीं आता"। 

और हां जय एक बात और :-
"जहां प्यार होता, वहीं झुकाव होता है, 
वरना अकड़ भरी इस दुनिया में, कहां कोई बदलाव होता है"

और सचिन कहता है "हाँ! मैं अदिति से मिलने गया था । क्यूँकि मुझे डर था कि अदिति तुम्हारी शादी की खबर सुन कर कुछ गलत ना कर ले, सिर्फ उसे समझाने उसके घर गया था"।

जय पलट कर पूछता है कि "समझाने गया था या प्यार करता था?" इस पर सचिन ने कहा "प्यार करता था और प्यार तेरी समझ के बाहर है" तू क्या जाने सच्चा प्यार जय, तुझे पता भी है अदिति तेरे पास आने के लिए सड़क पर पागलों की तरह पैदल ही निकल गई थी। मैने अदिति को समझाया और अपने साथ चलने के लिए मनाया
तेरे पास ही लाने ही वाला था, हम दोनों अदिति के घर से निकल ही रहे थे कि अचानक अदिति ने मुझसे कहा कि सचिन मझे जय को एक डायरी देनी है जो मैं घर भूल आयी हूँ। और अदिति गाड़ी से उतर कर सड़क पार करके डायरी लेने घर जा ही रही थी कि अचानक एक गाड़ी ने उसे पीछे से टक्कर मार दी।  मैं अदिति को अस्पताल ले कर जा रहा था कि ज्यादा खून बह जाने की वजह से बीच रास्ते में उसकी मौत हो गई"।
ये बताते बताते सचिन की आँखों में आंसू आजाते हैं, और वो कहता है "अदिति तुमसे बहुत प्यार करती थी जय।
तुम किस्मत वाले थे जय..... जो तुम्हे सच्चा प्यार  करने वाली अदिति जैसी लड़की मिली, पर तुम समझ नहीं पाए, और तो और जय तुमने तो अदिति से बात तक करनी छोड़ दी थी, फिर जीकर करती भी क्या बेचारी"

"मरने के बाद रोने से अच्छा है, जीते जी बात की जाए
थोड़ी देर ही सही, अपनों से मुलाकात की जाए"

जय रोते रोते सचिन को डायरी दिखता है, और कहता है "अदिति मझे ये  डायरी देना चाहती थी। जिसमें अदिति का हाल उसकी शब्दों के द्वारा साफ साफ पढ़ा जा सकता था"।

सचिन जय को संभलता है , और कहता है कि जय जब इंसान होता है तब क़दर नहीं होती। अब जब तुम्हे अपनी गलती का एहसास है तो अदिति इस दुनिया में नहीं है। अदिति हमारे बीच ही है हम सबके दिल में। 
जय रोते हुए कहता है.. की सचिन मै उससे माफी भी नहीं मांग पाया"। 

इस पर सचिन ने कहा कि जय  "अदिति ने तुम्हे उस दिन ही माफ कर दिया था। मरने से पहले अदिति ने मुझसे कहा था कि जय से कहना कि मैने जय को माफ किया, अदिति बहुत साफ दिल की थी जय"। 

जय अब सचिन के गले लग कर ...खूब रोने लगता है।

किसी ने सच ही कहा है। कि ताजमहल सबने देखा है पर मुमताज़ ने नहीं।

"इसलिए वक़्त रहते अपनों की कद्र करो।
आप लोग भी अपनों को वक़्त रहते प्यार और सम्मान दे। 
क्यूंकि जब इंसान अपनो को वक़्त नहीं देता
तो अपनों के बीच से वक़्त निकल जाता है।"

उम्मीद है आपको ये कहानी पसन्द आई होगी। 
अपना फीडबैक ज़रूर दीजिए comment box में... 🙏
मेरे quotes पढ़ने के लिए आप मुझे Instagram पर follow कर सकते हैं @quotestjs पर...

धन्यवाद 🙏

अगर आपने कहानी का पहला पार्ट नहीं पढ़ा है तो नीचे दिए लिंक पर टैप कर के पढ़ सकते है👇


कहानी का दूसरा हिस्सा👇


Want to Read More? Follow Me👇

अदिति की मौत का रहस्य❓🔐

सबसे पहले तो आप सभी लोगो से माफी मांगना चाहूंगी ।
आप सब लोगों को कहानी के लिए थोड़ा इंतज़ार करवाया।
तो चलिए, जानते है  अदिति की मौत का रहस्य।

अदिति कैसे मर गई ????इस सोच में जय अभी भी सड़क पर बैठा ही था।

 जय अभी सड़क पर इस सोच में बैठा था कि अचानक उसके मन में ख्याल आता है कि क्यों ना कॉलेज के दोस्तो से पूछा जाए।

जय  कॉलेज के दोस्तो को फोन करने के लिए मोबाइल अपनी जेब से निकलता है, लेकिन फोन कि बैटरी डाउन होती है।
जय पास के एक दुकान में जाता है।
और फोन को चार्ज करने के लिए मदद मांगता है।
और दुकानदार उसका फोन को चार्ज करने के लिए  लगा देता है।

अभी जय का फोन चार्ज ही हो रहा होता है
इतने ही उसका ध्यान एक लड़की पर जाता है।

अरे, ये क्या...
 ये तो अदिति की बेस्ट फ्रेंड शिवानी है।
और जय आवाज़ देता है 
 अरे शिवानी.......तुम...
शिवानी जय को पहचान जाती है।
और कहती है। अरे जय तुम......
कैसे हो??? जय...
जय की आंखे रोते रोते लाल हो चुकी है।
शिवानी का ध्यान जय के पास रखी डायरी पर जाता है।
वो थोड़ा हैरान हो जाती है।
शिवानी के कुछ पूछने से पहले ही जय रोते हुए उससे कहता है कि अदिति अब इस दुनिया में नहीं है मै जनता हूं शिवानी ,
लेकिन...... शिवानी आखिर अदिति की मौत कैसे हुई????
शिवानी सिसकती आवाज़ में कहती है कि 
जय अदिति के साथ जो हुआ वो किसी के साथ नहीं होना चाहिए था।
ना तुम अदिति के साथ ऐसा करते ना उसके साथ ये सब होता .........

इतना कह कर शिवानी वहां से जाने लगती है...........

जय शिवानी को रोकता है... शिवानी प्लीज मझे बताओ क्या हुआ  था अदिति के साथ.......
इतना कह कर  जय शिवानी के पैरो में गिर जाता है हाथ जोड़ते हुए उससे पूछता है।
शिवानी अदिति की दी हुई कसम तोड़ना नहीं चाहती थी ।
पर जय को ऐसे हाथ जोड़े देख अपनी चुप्पी तोड़ कुछ यू कहती है 
 
इस इश्क़ में कई दिल टूटे,
टूटे कई ख्वाब,
उसे हमे छोड़ दिया ,
दिए बिना कोई जवाब।।

इतना बोल शिवानी गुस्से में हो चुकी थी।
शिवानी चिल्ला कर बोली अब क्या जानना है जय,??

शिवानी ने बताया कि वो अदिति  को हमेशा समझती थी  कि जय को छोड़ दो वो तुम्हरे लायक नहीं है।
 मैने उससे पूछा कि क्या है जय??
उस पर अदिति कहा करती थी कि 

मेरे गीत के अल्फ़ाज़ है।
मेरे अधूरे-सा पर ख्वाब है।
जो बयां ना कर सकू वो राज है
सबके लिए आम होगा 
पर मेरे लिए ख़ास है।

तो मैंने पूछा था कि फिर जय तुम्हे क्यों छोड़ गया??? और तुमने जाने क्यों दिया ?? बताओ अदिति...
इस पर अदिति ने कुछ यूं जवाब दिया कि

प्यार किया कोई खेल नहीं, उसे बांध लू
ये दिल है, कोई जेल नहीं
रिहा किया उसे, अब कोई जंजीर नहीं
तेरे दिए वक़्त के साथ, फिर ये दर्द क्यों मंजूर नहीं।

और हां जय तुम्हरा दोस्त अदिति को प्यार करता था
 उसको तुम्हारे दोस्त सचिन ने, और तुमने मारा है।।

सचिन????
 ये क्या बोल रही हो ?शिवानी
 
हां जय ये सच है 
लॉक डाउन खत्म होने के बाद अदिति से मिलने  सचिन उसके घर गया था उसने अदिति को कहा कि मै तुमसे प्यार करता हूं।
 और अब तो जय भी नहीं है तुम मेरी गर्लफ्रेंड बन जाओ।
भूल जाओ जय को, और अब तो तुम दोनों साथ भी नहीं फिर मझे क्यों नहीं अपना रही तुम??

और अदिति ने कहा कि
क्या हुआ अगर हम साथ नहीं,
उसके बारे में ना सोचु ऐसी कोई रात नहीं,
भूल जाए वो मझे, पर कोई बात नहीं
नाराजगी है उससे, मगर कोई बेवफाई नहीं।

इतना  कह कर अदिति ने सचिन को घर से बहार निकाल दिया।
और सचिन अदिति के इस जवाब से चिढ़ जाता है
और कुछ दिन बाद अदिति को पता चला कि उसका जय शादी कर रहा है।
तो अदिति तुमसे मिलने के लिए घर से निकल ही रही थी, की अचानक सचिन को देखती है 
ओर इस बात को अदिति ने मझे बताया था।
लेकिन अगले दिन अख़बार में पढ़ती हूं 
कि अदिति की मौत हो गई है
मरने से पहले अदिति सचिन से मिली थी 
अब तुम अपने दोस्त से पूछो जय की अदिति के साथ उसने क्या किया।

अब जय, सचिन से मिलने के लिए जाता है।

दोस्तो इस कहानी के अगले भाग में हम लोग जानेंगे की मरने से पहले अदिति और सचिन के क्या बात हुई?? 


सच ही है 
मोहब्बत मिले तो खुशनुमा मिजाज़ कर देती है
ना मिले तो शायराना अंदाज़ कर देती है।
कुछ तो बात है इस मोहब्बत में,
किसी को आबाद, तो किसी को बर्बाद कर देती है।


उम्मीद है कि आपको कहानी पसंद आ रही होगी...
अपना फीडबैक ज़रूर दीजिए comment box में... 🙏

Want to Read More? Follow Me👇

धन्यवाद 🙏

अगर आपने कहानी का पहला पार्ट नहीं पढ़ा है तो नीचे दिए लिंक पर टैप कर के पढ़ सकते है👇



लॉक डाउन वाला ब्रेकअप🔐



आपने प्यार भरी कहानियाँ  तो बहुत सुनी होगी,

मगर मेरी कहानी थोड़ी अलग है और इस कहानी का शीर्षक है लॉकडॉउन वाला ब्रेकअप 

इस लॉकडॉउन में कई दिल मिले,

"कई नए लोग मिले
कुछ कुछ खुशियाँ, तो कुछ गम मिले
तो कई अर्सों के बिछड़े मिले" 

तो आज की हमारी जो कहानी है उसमें  दो किरदार है
जय और अदिति, दोनों एक दूसरे से कॉलेज के दिनों से प्यार करते है। 

और इन्हीं की ब्रेकअप की कहानी , तरुणा की ज़ुबानी 

तो अदिति और जय इस लॉकडॉउन में एक दूसरे  से  मिल नहीं पाते। जय, अदिति का फोन उठना और मैसेज का जवाब देना बंद कर देता है। अभी लोकडाउन शुरू ही हुआ कि जय ,अदिति को अनदेखा करने लगा। यूं तो दोनों प्यार करते थे लेकिन अदिति जय से सच्चा प्यार करती है।।
तो जानते है अदिति के प्यार ही हद।
जय के रूखे व्यवहार के कारण, अदिति, जय को मैसेज करती है कि

"मेरी ख़ामोशी सुन लो, 
थोड़ा मझे भी समझ लो, 
इस लाकडाउन में कॉल ना सही, 
मैसेज ही कर लो"

पर जय अदिति को ब्लॉक कर चुका है,और अदिति के कॉल करने पर रिश्ता खत्म करने के लिए कहता है।

अब अदिति का हाल कुछ यू है, और वो अपने दिल से कहती है 

"हम दोनों ज़िद पर अड़े थे, 
वो हमे छोड़ने की, 
और हम उन्हें पाने के लिए खड़े थे, 
दिल इस क़दर लगाया था, 
इस में भी हमने उन्हें ही जिताया था"

अब अदिति ने कॉल और मैसेज करना बंद कर दिया, अदिति का हाल बुरा होता जा रहा था वो अकेली रहने लगी। सबसे मिलना बात करना बन्द कर दिया था और अक्सर वो खुद से कहती 

"दिल में उतर कर भी, मेरे जज़्बात ना जाने
मेरा हाल सुन कर भी मेरे हालात ना जाने
जो नज़रे ना पड़ पाए , वो अल्फ़ाज़ क्या जाने"

अब अदिति ने डायरी लिखनी शुरू कर दी थी।और ये अदिति की पहली कोट्स थी, इसके बाद अदिति लिखने लगी। 

दोस्तो से जय को पता चला कि अदिति अब लिखती है और पहले से अदिति के हाल में सुधार था। 

जय उससे जलने लगा और उसको परेशान करने के लिए जय ने उसको कॉल लगाया, कॉल उठाते ही अदिति ने कहा:- 
"एक अरसे बाद आज उसका कॉल आया
वो हमसे कुछ भी ना बोल पाया
बस उसकी सिसकियों ने हमे भी रुलाया, 
उसकी सारी खता को हमने फिर भुलाया"

अदिति जय के एक फोन से ही इतना खुश थी ना जाने उसको क्या मिल गया हो। इससे ये देखा जा सकता है की अदिति के लिए जय कितना ख़ास है, दूर रह कर भी पास है।

कुछ २ दिन जय ने अदिति से ठीक से बात की होगी। और अदिति की खुशी का ठिकाना नहीं था, पर अदिति को क्या पता उसकी ये खुशी कुछ दिन की है। एक रोज़ अदिति ने सुबह जय को कॉल किया तो देखा कि। जय ने उसे फिर से ब्लॉक कर दिया था,

जय क्यों आया था फिर??? अदिति ने रोते हुए अपनी डायरी में लिखा:-  

"जब जाना ही था तो आया क्यों था,
खुद रोकर उसने हमें रुलाया क्यों था?"

और ज़मीन पर बैठे घंटो रोई । किसी तरह हिम्मत कर अदिति उठी और वापस अपने कमरे में जा कर अपनी डायरी में कुछ लिखने लगी। तो अदिति ने कुछ ये लिखा कि:-

"दिल से किया रिश्ता, एक पल में तोड़ दिया 
हमे पता भी नहीं चला, उसने हमे कब का छोड़ दिया।"

एक रोज़ अदिति को पता चलता है, कि सोशल मीडिया से दूर भागने वाला जय, जो सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तक नहीं करने देता था, वो अब सोशल मीडिया पर एक्टिव है ये जान कर उस पर अदिति ने कुछ यूं लिखा की:-

"सिर्फ मेरे साथ हाइक और व्हाट्सएप्प पर रहने वाला ,
इंस्टा, और टेलीग्राम पर आ गया है,
और मझे ऑक्सीजन कहने वाला,
अब किसी और को चूना लगा रहा है"

अदिति जान गई थी अब तक। कि क्यों जय ने उसे बिना वजह नहीं छोड़ा । और वक़्त यू ही बीतता गया, और कुछ साल बितने के बाद...........

जय अपनी जिदंगी में काफी आगे बढ़ गया था। जय ने शादी कर ली थी। मगर अदिति ने शादी नहीं की थी, 

पर जय भी अपनी शादीशुदा ज़िंदगी में कुछ ख़ास खुश नहीं था, जब भी उसकी बीवी के फोन पर किसी का फोन आता तो उसकी बीवी फोन पर बात नहीं करती। 

और जब जय घर पर नहीं होता तो उसकी बीवी फोन पर लगी रहती।  जय के पूछने पर कुछ ना कहती ।।

अब जय समझ गया कि जो उसने अदिति और बाकि लड़कियों के साथ किया  था कभी अब वो ही उसके साथ,उसकी पत्नी कर रही है। इस पर मुझे मेरी एक लेखिका सहेली की दो लाइन याद आ रही है :-

"दिल्लगी करोगे तो दिल टूटेगा ज़रूर, 
कभी उसका, कभी तुम्हारा"

जय को अपनी गलती का एहसास हुआ ,...... और वो अदिति से मिल कर माफ़ी मांगने के लिए घर से निकल गया। मगर जैसे ही वो अदिति के घर पहुंचा और दरवाज़ा खट खटाया। किसी ने दरवाज़ा नहीं खोला।

काफी देर तक दरवाज़ा ना खुलने पर जय के मन में ख्याल आया की कहीं अदिति को कुछ हो तो नहीं गया..... कभी कुछ... अब ये ख्याल आना भी लाजमी था। जय ने 2 साल से अदिति से कोई बात जो नहीं की थी।

बहुत कोशिशों के बाद जब दरवाजा नहीं खुला तब जय खिड़की से घर में घुसने की कोशिश करता है.... और जैसे ही जय, खिड़की से अदिति के घर में घुसता है,  वो अदिति अदिति चिला ही रहा होता है। लेकिन वहां कोई नहीं होता। अब जय और घबरा जाता है। और अदिति के रूम में जाता है। जैसे ही जय कमरे में जाता है। उसका पैर एक डायरी पर पड़ता है,

जिसके आखिरी पन्ने पर कुछ यूं लिखा है 

"कहां सोचा था कि कभी लिख भी पाएंगे,
तुम्हारे बिना जी भी पाएंगे,
अब जो दूर हो, घमंड में अपने चूर हो , 
तुम्हे भी समझ आएगा ये दर्द, 
जब तुमसे, तुम्हारा कोई अपना दूर हो"

जय उस डायरी को उठा कर जैसे ही खड़ा होता है, तो सामने की दीवार पर एक फोटो को देख  कर जय चौक जाता है, उस दीवार पर एक तस्वीर है, और उस पर माला डली हुई है, उस तस्वीर में कोई और नहीं बल्कि अदिति होती है। जय के मानो पैरो से जमीन ही निकल गई हो, जय पसीने से पूरा भीेग जाता है। थोड़ा पास जा कर जय की नज़र तस्वीर की धूल पर जाती है। जय जैसे ही उस तस्वीर पर लगी धूल साफ करता है

तो वो देखता की अदिति की मौत उसकी शादी से एक दिन पहले ही हो हुई थी। अब जय जमीन पर गिर पड़ता है। 

जय बहुत बुरी तरह अदिति..........अदिति .......बोलते हुए बहुत रोता है। और वो पल याद करता है जब वो अदिति को कहता था कि तुम मर जाओ तो मझे सुकून मिले। जय  को अपने बोले हुए शब्दों पर पछतावा होता है। कुछ देर बाद अदिति की तस्वीर और डायरी ले कर उसके घर से चला जाता है।.... कुछ दूर चलने पर पर सड़क के किनारे बैठ जाता  है। अपने साथ लाई अदिति की डायरी पड़ने लगता है। जिसने कोट्स से ज्यादा  अदिति का दर्द लिखा था।

वो दर्द, जो अदिति किसी से ना कह पाई, ना जय के बिना रह पाई। जय से अदिति दूर  हो कर भी पास थी,और आज पास होकर भी दूर है।

तो दोस्तो बाद में पछताने से अच्छा है। जो आपसे प्यार करे उसको समझो और अपनी बेवकूफी के चलते उसे कभी मत खो।  

कहानी के अगले हिस्से में हम देखंगे की अदिति की मौत कैसे हुई।
जय के मन में भी ये ही सवाल है कि अदिति की मौत आखिर हुई कैसे???

तो कुछ लाइन है जो मै कहना चाहूंगी अदिति के अंदाज़ में :-

"हाँ! ख्वाब हूं तेरा, मगर साथ नहीं
रूह साथ है तेरे, क्या हुआ अगर मेरा जिस्म पास नहीं।"

उम्मीद है कि आपको कहानी पसंद आयी होगी...
अपना फीडबैक ज़रूर दीजिए comment box में... 🙏

Want to Read More? Follow Me👇

धन्यवाद 🙏

गुमनाम दोस्त

कोई तुमसे पूछे कौन हूं मैं, तुम कह देना कोई खास नहीं    एक दोस्त है पक्का कच्चा सा, एक झूठ है आधा सच्चा सा जस्बात से ढका  एक परदा है एक बहान...