आपने प्यार भरी कहानियाँ तो बहुत सुनी होगी,
मगर मेरी कहानी थोड़ी अलग है और इस कहानी का शीर्षक है लॉकडॉउन वाला ब्रेकअप
इस लॉकडॉउन में कई दिल मिले,
"कई नए लोग मिले
कुछ कुछ खुशियाँ, तो कुछ गम मिले
तो कई अर्सों के बिछड़े मिले"
तो आज की हमारी जो कहानी है उसमें दो किरदार है
जय और अदिति, दोनों एक दूसरे से कॉलेज के दिनों से प्यार करते है।
और इन्हीं की ब्रेकअप की कहानी , तरुणा की ज़ुबानी
तो अदिति और जय इस लॉकडॉउन में एक दूसरे से मिल नहीं पाते। जय, अदिति का फोन उठना और मैसेज का जवाब देना बंद कर देता है। अभी लोकडाउन शुरू ही हुआ कि जय ,अदिति को अनदेखा करने लगा। यूं तो दोनों प्यार करते थे लेकिन अदिति जय से सच्चा प्यार करती है।।
तो जानते है अदिति के प्यार ही हद।
जय के रूखे व्यवहार के कारण, अदिति, जय को मैसेज करती है कि
"मेरी ख़ामोशी सुन लो,
थोड़ा मझे भी समझ लो,
इस लाकडाउन में कॉल ना सही,
मैसेज ही कर लो"
पर जय अदिति को ब्लॉक कर चुका है,और अदिति के कॉल करने पर रिश्ता खत्म करने के लिए कहता है।
अब अदिति का हाल कुछ यू है, और वो अपने दिल से कहती है
"हम दोनों ज़िद पर अड़े थे,
वो हमे छोड़ने की,
और हम उन्हें पाने के लिए खड़े थे,
दिल इस क़दर लगाया था,
इस में भी हमने उन्हें ही जिताया था"
अब अदिति ने कॉल और मैसेज करना बंद कर दिया, अदिति का हाल बुरा होता जा रहा था वो अकेली रहने लगी। सबसे मिलना बात करना बन्द कर दिया था और अक्सर वो खुद से कहती
"दिल में उतर कर भी, मेरे जज़्बात ना जाने
मेरा हाल सुन कर भी मेरे हालात ना जाने
जो नज़रे ना पड़ पाए , वो अल्फ़ाज़ क्या जाने"
अब अदिति ने डायरी लिखनी शुरू कर दी थी।और ये अदिति की पहली कोट्स थी, इसके बाद अदिति लिखने लगी।
दोस्तो से जय को पता चला कि अदिति अब लिखती है और पहले से अदिति के हाल में सुधार था।
जय उससे जलने लगा और उसको परेशान करने के लिए जय ने उसको कॉल लगाया, कॉल उठाते ही अदिति ने कहा:-
"एक अरसे बाद आज उसका कॉल आया
वो हमसे कुछ भी ना बोल पाया
बस उसकी सिसकियों ने हमे भी रुलाया,
उसकी सारी खता को हमने फिर भुलाया"
अदिति जय के एक फोन से ही इतना खुश थी ना जाने उसको क्या मिल गया हो। इससे ये देखा जा सकता है की अदिति के लिए जय कितना ख़ास है, दूर रह कर भी पास है।
कुछ २ दिन जय ने अदिति से ठीक से बात की होगी। और अदिति की खुशी का ठिकाना नहीं था, पर अदिति को क्या पता उसकी ये खुशी कुछ दिन की है। एक रोज़ अदिति ने सुबह जय को कॉल किया तो देखा कि। जय ने उसे फिर से ब्लॉक कर दिया था,
जय क्यों आया था फिर??? अदिति ने रोते हुए अपनी डायरी में लिखा:-
"जब जाना ही था तो आया क्यों था,
खुद रोकर उसने हमें रुलाया क्यों था?"
और ज़मीन पर बैठे घंटो रोई । किसी तरह हिम्मत कर अदिति उठी और वापस अपने कमरे में जा कर अपनी डायरी में कुछ लिखने लगी। तो अदिति ने कुछ ये लिखा कि:-
"दिल से किया रिश्ता, एक पल में तोड़ दिया
हमे पता भी नहीं चला, उसने हमे कब का छोड़ दिया।"
एक रोज़ अदिति को पता चलता है, कि सोशल मीडिया से दूर भागने वाला जय, जो सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तक नहीं करने देता था, वो अब सोशल मीडिया पर एक्टिव है ये जान कर उस पर अदिति ने कुछ यूं लिखा की:-
"सिर्फ मेरे साथ हाइक और व्हाट्सएप्प पर रहने वाला ,
इंस्टा, और टेलीग्राम पर आ गया है,
और मझे ऑक्सीजन कहने वाला,
अब किसी और को चूना लगा रहा है"
अदिति जान गई थी अब तक। कि क्यों जय ने उसे बिना वजह नहीं छोड़ा । और वक़्त यू ही बीतता गया, और कुछ साल बितने के बाद...........
जय अपनी जिदंगी में काफी आगे बढ़ गया था। जय ने शादी कर ली थी। मगर अदिति ने शादी नहीं की थी,
पर जय भी अपनी शादीशुदा ज़िंदगी में कुछ ख़ास खुश नहीं था, जब भी उसकी बीवी के फोन पर किसी का फोन आता तो उसकी बीवी फोन पर बात नहीं करती।
और जब जय घर पर नहीं होता तो उसकी बीवी फोन पर लगी रहती। जय के पूछने पर कुछ ना कहती ।।
अब जय समझ गया कि जो उसने अदिति और बाकि लड़कियों के साथ किया था कभी अब वो ही उसके साथ,उसकी पत्नी कर रही है। इस पर मुझे मेरी एक लेखिका सहेली की दो लाइन याद आ रही है :-
"दिल्लगी करोगे तो दिल टूटेगा ज़रूर,
कभी उसका, कभी तुम्हारा"
जय को अपनी गलती का एहसास हुआ ,...... और वो अदिति से मिल कर माफ़ी मांगने के लिए घर से निकल गया। मगर जैसे ही वो अदिति के घर पहुंचा और दरवाज़ा खट खटाया। किसी ने दरवाज़ा नहीं खोला।
काफी देर तक दरवाज़ा ना खुलने पर जय के मन में ख्याल आया की कहीं अदिति को कुछ हो तो नहीं गया..... कभी कुछ... अब ये ख्याल आना भी लाजमी था। जय ने 2 साल से अदिति से कोई बात जो नहीं की थी।
बहुत कोशिशों के बाद जब दरवाजा नहीं खुला तब जय खिड़की से घर में घुसने की कोशिश करता है.... और जैसे ही जय, खिड़की से अदिति के घर में घुसता है, वो अदिति अदिति चिला ही रहा होता है। लेकिन वहां कोई नहीं होता। अब जय और घबरा जाता है। और अदिति के रूम में जाता है। जैसे ही जय कमरे में जाता है। उसका पैर एक डायरी पर पड़ता है,
जिसके आखिरी पन्ने पर कुछ यूं लिखा है
"कहां सोचा था कि कभी लिख भी पाएंगे,
तुम्हारे बिना जी भी पाएंगे,
अब जो दूर हो, घमंड में अपने चूर हो ,
तुम्हे भी समझ आएगा ये दर्द,
जब तुमसे, तुम्हारा कोई अपना दूर हो"
जय उस डायरी को उठा कर जैसे ही खड़ा होता है, तो सामने की दीवार पर एक फोटो को देख कर जय चौक जाता है, उस दीवार पर एक तस्वीर है, और उस पर माला डली हुई है, उस तस्वीर में कोई और नहीं बल्कि अदिति होती है। जय के मानो पैरो से जमीन ही निकल गई हो, जय पसीने से पूरा भीेग जाता है। थोड़ा पास जा कर जय की नज़र तस्वीर की धूल पर जाती है। जय जैसे ही उस तस्वीर पर लगी धूल साफ करता है
तो वो देखता की अदिति की मौत उसकी शादी से एक दिन पहले ही हो हुई थी। अब जय जमीन पर गिर पड़ता है।
जय बहुत बुरी तरह अदिति..........अदिति .......बोलते हुए बहुत रोता है। और वो पल याद करता है जब वो अदिति को कहता था कि तुम मर जाओ तो मझे सुकून मिले। जय को अपने बोले हुए शब्दों पर पछतावा होता है। कुछ देर बाद अदिति की तस्वीर और डायरी ले कर उसके घर से चला जाता है।.... कुछ दूर चलने पर पर सड़क के किनारे बैठ जाता है। अपने साथ लाई अदिति की डायरी पड़ने लगता है। जिसने कोट्स से ज्यादा अदिति का दर्द लिखा था।
वो दर्द, जो अदिति किसी से ना कह पाई, ना जय के बिना रह पाई। जय से अदिति दूर हो कर भी पास थी,और आज पास होकर भी दूर है।
तो दोस्तो बाद में पछताने से अच्छा है। जो आपसे प्यार करे उसको समझो और अपनी बेवकूफी के चलते उसे कभी मत खो।
कहानी के अगले हिस्से में हम देखंगे की अदिति की मौत कैसे हुई।
जय के मन में भी ये ही सवाल है कि अदिति की मौत आखिर हुई कैसे???
तो कुछ लाइन है जो मै कहना चाहूंगी अदिति के अंदाज़ में :-
"हाँ! ख्वाब हूं तेरा, मगर साथ नहीं
रूह साथ है तेरे, क्या हुआ अगर मेरा जिस्म पास नहीं।"
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